सोने की पहचान तपने से एवं मनुष्य की पहचान कसने से होती है:-महाराज श्री।

पंचकल्याणक महामहोत्सव के पात्र चयन महोत्सव का हुआ आयोजन।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। धर्मनगरी देवली में पंचबालयति व चौबीस श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के पात्र चयन महोत्सव का आयोजन देवली नगरपालिका टीनशेड में परम पूज्य श्रमण मुनि श्री 108 प्रणीत सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक105 श्री विधेय सागर जी महाराज पावन सान्निध्य में आयोजित हुआ। आयोजन के दौरान सर्वप्रथम चौबीस तीर्थंकर एवं पँचबालयती तीर्थंकर के जिनबिंब का भव्य जुलूस चन्द्रपभु दिगम्बर जैन मंदिर से मुनि संघ के साथ प्रारम्भ होते हुए मुख्य बाजार से होते हुए टीनशेड में पहुंचा जहां पर एक विशाल सभा मे यह जुलूस परिवर्तित हुआ। विकास जैन टोरिडी ने बताया की आयोजन के तहत सर्वप्रथम समाज अध्यक्ष एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा चित्र अनावरण, द्वीप प्रज्वलन, एवं पादप्रक्षालन किया गया जिसके पश्चात पात्र चयन का आयोजन प्रारम्भ हुआ। सर्वप्रथम भगवान आदिनाथ के माता-पिता बनने का सौभाग्य अशोक कुमार -शांति देवी ,लक्की -टीमा सर्राफ परिवार को प्राप्त हुआ। इसी के साथ पंकज एवं लक्की सर्राफ ने बताया की सौधर्म इंद्र का सौभाग्य विनोद कुमार, पार्थ कुमार मोतीपुरा वाले परिवार, कुबेर इंद्र गोविंद रामजी बंशीलाल ,राजेश सर्राफ परिवार, विधिनायक आत्माराम सर्राफ परिवार,महायज्ञनायक बसंतीलाल चांदमल , अरविंद पंकज सर्राफ़ परिवार, ईशान इंद्र पदमचंद , सोनू कुमार टोरडी वाले परिवार, सानत इंद्र माणकचन्द रमेश ,राकेश बाजटा वाले, माहेन्द्र इंद्र महावीर प्रसाद, मयंक , मंजेश, बरवास वाले परिवार को प्राप्त हुआ। इसी के साथ बालक आदिनाथ बनने का सौभाग्य हरमुखराय चेतन , उत्तम परिवार कालेड़ा परिवार को प्राप्त हुआ।

इसी के साथ कई मुख्य पात्रो का चयन इस आयोजन में हुआ। विकास जैन ने बताया की इस आयोजन के पश्चात धर्मसभा में मुनि श्री 108 प्रणीत सागर जी महाराज ने सभा को अपनी अमृत मयी वाणी से लाभान्वित करते हुए बताया की किसी भी आयोजन में या पंचकल्याणक में जब युवा साथ हो तो आयोजन अभूतपूर्व हो जाता है! मुनिराज ने बहिरंग तप का वर्णन किया। महाराज ने बताया की सोने की पहचान तपने से एवं मनुष्य की पहचान कसने से होती है। मुनिराज ने सभी पात्रों को आशीर्वाद देते हुए सभा का समापन किया। दिनेश बाजटा ने बताया की कार्यक्रम सम्पूर्ण संचालन अनिल जैन केकड़ी, दिल्ली से आये पंचकल्याण के प्रतिष्ठाचार्य पंडित प्रवर श्री विवेक जी शाष्त्री एवं साथी कलाकार चक्रेश जैन द्वारा किया गया।

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