देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। मुनि श्री वैराग्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज के सानिध्य में श्रावक संस्कार शिविर प्रारंभ हो चुका है जिसमें 100 से अधिक शिविरार्थी भाग ले रहे है जैन धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और पवित्र पर्युषण पर्व (दशलक्षण महापर्व) 16 सितंबर 2026 से शुरू हो चुका है. दिगंबर जैन परंपरा में भाद्रपद शुक्ल पंचमी से शुरू होने वाले इस 10 दिवसीय आध्यात्मिक उत्सव के पहले दिन ‘उत्तम क्षमा’ धर्म मनाया जाता है। उत्तम क्षमा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने, क्रोध का त्याग करने और जीवन में शांति की स्थापना करने का महामंत्र है। मूलनायक महावीर स्वामी का प्रथम अभिषेक निर्मल कुमार जी पवन कुमार की पाटनी
महावीर स्वामी की शांति धारा प्रथम एवं संध्याकालीन आरती डॉ विमल कुमार देशबंधु अजमेरा महावीर स्वामी की शांति धारा द्वितीय विमल सोगानी बड़गांव वाले शांतिनाथ स्वामी की शांति धारा राजकुमार दीपांशु अजमेरा पारसनाथ भगवान की दोनों और की शांति धारा संजय कुमार अक्षत की काला परिवार ने प्राप्त किया।





