गांव सौभाग्यशाली है कि इसे मिला राम सिंह शक्तावत जैसा समाजसेवी – मंत्री कन्हैया लाल चौधरी….

* बाबा साहेब की प्रतिमा का हुआ भव्य अनावरण….

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुचलवाड़ा कला ने 20 सितंबर को इतिहास रच दिया। गांव के भामाशाह और समाजसेवी, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रखर अनुयायी राम सिंह शक्तावत के जन्मदिवस पर उनके सहयोग और प्रेरणा से पंचायत प्रांगण में बावा साहेब की भव्य मूर्ति का अनावरण हुआ। इस ऐतिहासिक क्षण ने पूरे क्षेत्र की गरिमा बढ़ा दी। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी, लोकसभा स्पीकर के ओएसडी एवं कुश्ती संघ अध्यक्ष राजस्थान राजीव दत्ता, विधायक जहाजपुर गोपीचंद मीणा, विधायक निवाई रामसहाय वर्मा, सरपंच छोटू लाल बेरवा, पूर्व IAS शिवजी राम मीणा, पूर्व प्रधान देवली शकुंतला वर्मा, पूर्व प्रधान टोडारायसिंह शीला राजकुमार मीणा, पूर्व छात्र नेता रंगलाल मीणा, रेगर समाज भीलवाड़ा जिला अध्यक्ष कैलाश देवातवाल, रेगर समाज टोंक जिला अध्यक्ष शंकर लाल हाथीवाल, पूर्व उपाध्यक्ष नगरपालिका देवली तनसुख बेरवा, पूर्व उपाध्यक्ष नगरपालिका देवली जितेंद्र चौधरी, महेंद्र बेरवा, अध्यक्ष बाबा रामदेव सेवा समिति देवली छोटू लाल बेरवा सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह और युवाओं में जबरदस्त जोश देखा गया। आयोजन समिति के अनुसार प्रतिमा अनावरण के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और बाबा साहेब के विचारों पर आधारित ‘भाषण भी हुए।

प्रतिमा अनावरण ने दिया ऐतिहासिक अवसर एकता और भाईचारे का बना संदेशवाहक….

भामाशाह और समाजसेवी राम सिंह शक्तावत ने अपने संबोधन में कहा कि “बाबा साहेब किसी जाति विशेष के भगवान नहीं हैं। उन्होंने संविधान बनाते समय हर भारतीय आत्मा को ध्यान में रखा। अगर बाबा साहेब ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष नहीं किया होता तो आज महिलाएं शिक्षा और राजनीति में आगे नहीं आ पातीं। उन्होंने हर उस वंचित के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है जो समाज में पिछड़ा रहा। मेरा मानना है कि बाबा साहेब हर समाज के भगवान हैं और भारत संविधान के बिना नहीं चल सकता। हमें संविधान के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि “आने वाले नवंबर में मेरी बेटी का विवाह है और मेरा सौभाग्य होगा कि उसी अवसर पर गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह भी कराया जाए। यह सेवा नहीं, बल्कि मेरा संकल्प है। जिस तरह मेरी बेटी ससुराल जाएगी, उसी तरह हर गरीब बेटी को भी मैं यहां से हेलीकॉप्टर के अंदर विदा करूंगा। कुचलवाड़ा कला एक ऐसी पंचायत है जहां न कोई ऊंच-नीच है, न कोई भेदभाव-यहां केवल मानवता सर्वोपरि है। विधायक गोपीचंद मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि “विकास कभी रुकता नहीं है, उसे कुछ लोग रुकवाते हैं। पिछले कार्यकाल में मैं विपक्ष में था, तब विकास रोकने की कोशिशें हुई। आज मैं सत्ता पक्ष में हूं, और अब विकास रुक नहीं रहा बल्कि तेज़ी से चल रहा है। इतिहास उठाकर देख लो, कभी इतना विकास नहीं हुआ जितना आज हो रहा है। अगर कोई मेरे विकास एक्शन प्लान को फेल करके दिखा दे तो मैं मान जाऊंगा। लेकिन गुंडागर्दी और भाई-भाई को लड़ाने वाली राजनीति अब इस विधानसभा क्षेत्र में बर्दाश्त नहीं की जाएगी केवल विकास की बात की जाएगी।


* गांव सौभाग्यशाली है कि इसे मिला राम सिंह शक्तावत जैसा समाजसेवी – मंत्री कन्हैया लाल चौधरी…

कैबिनेट मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने कहा कि “हम सबके लिए यह गौरव की बात है कि बाबा साहेब अंबेडकर की मूर्ति का अनावरण हम सबकी आंखों के सामने हुआ। यह गांव सौभाग्यशाली है कि इसे राम सिंह शक्तावत जैसे भामाशाह मिले हैं। पानी से लेकर विकास तक किसी भी क्षेत्र में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।” राजीव दत्ता ने कहा कि “जयपुर में बहुत बड़ा फिल्म फेस्टिवल चल रहा था, लेकिन मैंने उसे छोड़कर सिर्फ बाबा साहेब अंबेडकर के इस कार्यक्रम में शामिल होने को चुना। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि ऐसे गांव में आया हूं जहां बावा साहेब के उद्देश्यों पर चलने वाली सोच जीवित है। शक्तावत साहब को मैं दिल से बधाई देता हूं। यह मूर्ति शिक्षा, एकता और भाईचारे का संदेश लेकर आएगी।” निवाई विधायक राम सहाय वर्मा ने कहा कि “हमें बाबा साहेब के उद्देश्यों पर चलना चाहिए। इस कार्यक्रम में शामिल होकर मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मैं शक्तावत साहब का आभारी हूं जिन्होंने गांव में बाबा साहेब की मूर्ति स्थापित कर एक ऐतिहासिक कार्य किया है।” कार्यक्रम के समापन पर राम सिंह शक्तावत ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “मुझे सेवा का नशा सा हो गया है, जो उतरने का नाम ही नहीं लेता। बस जनता का ऐसा ही प्यार मिलता रहे। आज आप सब यहां पधारे, इसके लिए मैं आप सबका दिल से बहुत-बहुत आभारी हूं।” यह आयोजन केवल प्रतिमा अनावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे कुचलवाड़ा क्षेत्र में सामाजिक चेतना, भाईचारे और शिक्षा-समानता के संदेश को फैलाने वाला एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ।

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