विलासी लोगों से तो भगवान भी दूर भागते हैं:-दिव्य मुरारी बापू।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। शहर के गौरवपथ स्थित नगर पालिका के टीनशेड परिसर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ महोत्सव के दौरान महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने अपनी वाणी से श्रद्धालुओं को संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में भागवत महिमा का श्रवण करवाते हुए श्री शुकदेवजी का आगमन की बात करते हुए कहा कि
आपका मन जहाँ बैठा है, वहीं आप बैठे हो। मन यदि विषयों में मग्न है तो हजार बार स्नान करने के बाद भी आप अपवित्र रहोगे और उस समय तक प्रभु के साथ भक्ति सम्बन्ध नहीं बाँध सकोगे। मन यदि प्रभु के चरणों में संलग्न होगा तो शरीर की हर स्थिति में आप परम पवित्र ही होगे और आपके साथ बंधे हुए भक्ति-सम्बन्ध की पूर्ति के लिये प्रभु सामने दौड़े चले आयेंगे।मन से संसार विलीन होने पर ही ब्रह्म-सम्बन्ध स्थापित होता है। ब्रह्म-सम्बन्ध में तन का नहीं अपितु मन का महत्व है। शरीर तो मेद, मज्जा, रक्त, मांस से भरा हुआ है जिसे प्रभु स्पर्श नहीं करते। श्री कृष्ण के स्मरण में जब देह का बोध समाप्त होता है और संसार विलीन हो जाता है, तभी मन प्रभु में तन्मय होता है एवं तभी प्रभु से भक्ति सम्बन्ध स्थापित होता है। अतः सबसे अधिक महत्व मन की तन्मयता का है। चलो हम सब अपने चित्त को प्रभु चरणों में समर्पित कर दें, ताकि इस सम्बन्ध को ढूंढते हुए स्वयं परमात्मा दौड़े चले आयेंगे। महाराज श्री ने कहा कि विलासी लोगों से तो भगवान भी दूर भागते हैं। आयोजन से जुड़े महावीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन दोपहर 12:15 से शाम 4:15 बजे तक कथा का वाचन किया जा रहा है। इस महोत्सव को लेकर क्षेत्र के लोगों में काफी उत्साह है और आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतरीन इंतजाम किए हैं।कथा के व्यवस्थापक घनश्याम दास महाराज (पुष्कर-गोवर्धन) ने सभी भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल आकर भक्ति सुधा का पान करने का आग्रह किया है।

 

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