अपना व्यक्तित्व बनाना स्वयं के हाथ में है:-दिव्य मुरारी बापू।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर देवली के अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 श्री श्री दिव्य मुरारी बापू ने यागवलक्य-भारद्वाज संवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व व्यक्ति का दर्पण है। हर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का धनी है। व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके गुणों पर निर्भर करता है। शारीरिक सुन्दरता से व्यक्ति का व्यक्तित्व मोहक अथवा आकर्षक नहीं होता। सुन्दरता के साथ-साथ भाषा में मधुरता, स्वभाव में सरलता, व्यवहार में नम्रता, बुद्धि में विवेक व सभी के साथ मिलनसार प्रवृत्ति आदि से ही व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है। हममें से प्रत्येक की इच्छा होती है कि परिवार व समाज में सभी से हमे स्नेह व आदर मिले, लोग हमें पसन्द करें व हमारी कद्र हो। साथ ही यह भी अपने आपसे पूछना होगा कि हम इसके लिये कितने उपयुक्त हैं? क्या हमारे में व्यवहार कुशलता व परोपकार की प्रवृत्ति है? क्या हम न्याय का अनुसरण करते हैं? क्या हम अपनी सुख सुविधाओं के साथ-साथ दूसरों की सुख सुविधा का भी ध्यान रखते हैं? जिस सम्मान व इज्जत की हम अपेक्षा करते हैं, वही इज्जत व सम्मान क्या हम दूसरों को देते हैं? यदि हां तो यह निर्विवाद सत्य है कि जितना स्नेह व आदर हम दूसरों का करते हैं, उतना ही स्नेह व आदर दूसरे भी हमारा करेंगे। यह एक वैज्ञानिक तथ्य भी है, क्योंकि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। हम अपने मन के मालिक हैं। मन ही जीवन की सीढ़ी है। सीढ़ी से ऊपर भी चढ़ा जा सकता है व नीचे भी उतरा जा सकता है जिसका निर्णय अपने व्यवहार व आचरण पर निर्भर रहता है। अपना व्यक्तित्व बनाना अपने हाथ में है। यदि व्यक्तित्व गुण सम्पन्न व आकर्षक होगा, तो सभी हमारे अनुकूल होंगे, जो हम चाहते हैं। यही लोकप्रियता का मापदण्ड है। कथा के दौरान महिलाओं ने भव्य विभोर होकर नृत्य किया। कथा का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। श्री राम कथा का आयोजन श्री श्री घनश्याम दास जी महाराज के सानिध्य में चल रहा है।

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