देवली में (ADJ) कोर्ट की स्थापना के लिए सांसद हरीश चंद्र मीणा ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र।

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देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद और राजस्थान के पूर्व पुलिस महानिदेशक (I.P.S) हरीश चंद्र मीणा ने देवली उपखंड में न्यायिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सांसद मीणा ने राजस्थान सरकार के  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक आधिकारिक पत्र (पत्रांक-HCM/2026/89) भेजकर देवली में लंबे समय से संचालित ए.डी.जे. कैम्प कोर्ट को स्थायी अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में क्रमोन्नत करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय सिविल एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय को भी अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) न्यायालय के रूप में अपग्रेड करने का आग्रह किया है। ​सांसद हरीश चंद्र मीणा ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि देवली क्षेत्र में पिछले लगभग 34 वर्षों से न्यायालय संचालित हो रहे हैं। वर्तमान समय में यहाँ चार अलग-अलग न्यायालय कार्यरत हैं, जिनमें सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट, ग्राम न्यायालय और पिछले 8 वर्षों से संचालित हो रहा ए.डी.जे. कैम्प कोर्ट शामिल हैं। देवली बार एसोसिएशन द्वारा सौंपे गए एक ज्ञापन का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक महत्व को देखते हुए यहाँ एक स्थायी उच्च स्तरीय अदालत का होना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
स्थानीय अदालतों में हजारों की संख्या में दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) मामले लंबित पड़े हैं। जिला न्यायालय टोंक में वर्तमान में अकेले देवली क्षेत्र से संबंधित लगभग 750 अपीलें और मामले विचाराधीन हैं। देवली, दूनी, घाड़ और नासिरदा आदि थाना क्षेत्रों से संबंधित एन.डी.पी.एस. (NDPS), एक्साइज (Excise), एम.ए.सी.टी. (MACT) और पारिवारिक विवादों के मामलों की संख्या में लगातार तेजी से वृद्धि हो रही है। ​पत्र में पड़ोसी तहसीलों का उदाहरण देते हुए भेदभाव और न्याय की धीमी गति पर भी चिंता व्यक्त की गई है। सांसद ने रेखांकित किया कि देवली के आस-पास की अन्य पड़ोसी तहसीलों जैसे निवाई, उनियारा, मालपुरा, जहाजपुर (भीलवाड़ा) एवं केकड़ी में पहले से ही ए.डी.जे. न्यायालय स्थायी रूप से स्थापित किए जा चुके हैं और वहाँ सुचारू रूप से कार्य चल रहा है। इसके विपरीत, देवली जैसी महत्वपूर्ण तहसील में वर्षों बीत जाने के बाद भी केवल ‘कैम्प कोर्ट’ (स्थाई के बजाय अस्थाई व्यवस्था) के भरोसे ही काम चलाया जा रहा है, जिससे स्थानीय जनता और वकीलों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। ​सांसद मीणा ने मुख्यमंत्री से जनहित और न्यायिक सुगमता को सर्वोपरि रखने की अपील की है। उन्होंने पत्र के अंत में विश्वास जताया कि यदि देवली के कैम्प कोर्ट को पूर्णकालिक स्थायी अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में तब्दील कर दिया जाता है और सिविल कोर्ट को ACJM में क्रमोन्नत किया जाता है, तो क्षेत्र की आम जनता को त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय अपने ही क्षेत्र में प्राप्त हो सकेगा। इस कदम से न केवल टोंक जिला मुख्यालय पर मुकदमों का बोझ कम होगा, बल्कि गवाहों और पक्षकारों को भी लंबी दूरी तय करने से मुक्ति मिलेगी।

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