पारंपरिक तरीके से ‘सिंदूर खेला’ का हुआ आयोजन।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। नवरात्रि की दशमीं पर गुरुवार को बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से ‘सिंदूर खेला’ का आयोजन किया। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे के गाल और माथे पर सिंदूर लगाकर बधाई दी और मां दुर्गा को विदाई दी। बंगाली समाज में यह परंपरा पति की लंबी उम्र और खुशहाल परिवार की कामना के लिए निभाई जाती है।

विजयदशमी के अवसर पर मां दुर्गा सेवा समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में, बंगाली समाज की महिलाओं ने मां दुर्गा की विदाई से पहले उन्हें सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद उन्होंने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मंगलगीत गाए और मां दुर्गा से सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद मांगा। दुर्गा पूजा के अंतिम दिन ‘सिंदूर खेला’ का विशेष महत्व है। समिति के सदस्य अशोक मंडल ने बताया कि इस दिन महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं।मान्यता है कि मां दुर्गा नवरात्रि में अपने मायके आती हैं और दशमी के दिन ससुराल लौट जाती हैं। इसे यादगार बनाने के लिए ‘सिंदूर खेला’ की परंपरा निभाई जाती है, जहां हर सुहागन यही प्रार्थना करती है कि मां दुर्गा उनके सुहाग की रक्षा करें। इस दौरान सिंदूर का माहौल पूरे आयोजन को भक्तिमय बना देता है।

इसकी के साथ ही बंगाली कॉलोनी में सप्तमी से चलने वाले दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन भी हो जाता है। कार्यक्रम में नवविवा दुर्गा पूजा कमेटी अध्यक्ष शंकर सरकार उपाध्यक्ष प्रवीण मंडल सचिव अमर दास केशियर बाबू विश्वास उपसचिव शंकर पोद्दार शेकर मंडल राजू विश्वास पुजारी प्रशाद चक्रवर्ती रमेन पाल मां आरती में रोबिन भक्त संजीत भक्त,सोनु, धनंजय, सन्तू,सुनिल विश्वास,कविता राय,निशिता,नीलु, सिवानी,पुनम,रेखा मौजूद रहे। विसर्जन शोभा यात्रा कल प्रातः 10:00 बजे पूरे देवली शहर होते हुए गणेश जी के पहुँचेगी।

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