देवली/जहाजपुर:-(बृजेश भारद्वाज)। जिस स्कूल को संस्कार, अनुशासन और शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, वही जब मनोरंजन का मंच बन जाए तो सवाल उठना लाज़मी है। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय शक्करगढ़, तहसील जहाजपुर में आयोजित 12वीं कक्षा की विदाई समारोह का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सरकारी बालिका विद्यालय के मंच पर तेज और अश्लील पंजाबी गाने बज रहे हैं,जिन पर न केवल छात्राएं बल्कि महिला शिक्षिकाएं भी झूमती नजर आ रही हैं।
जिस उम्र में बालिकाओं को संस्कार, संयम और जीवन की दिशा देने की आवश्यकता होती है, उसी उम्र में उन्हें किस तरह के कार्यक्रम परोसे जा रहे हैं, यह दृश्य उसका जीता-जागता उदाहरण बन गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई निजी आयोजन नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालय का आधिकारिक विदाई समारोह था, जहां अनुशासन और मर्यादा की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिन शिक्षकों पर समाज को नई दिशा देने की जिम्मेदारी है, क्या वही शिक्षक छात्राओं को फूहड़ता का पाठ पढ़ा रहे हैं? मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग भी हरकत में आया है। इस संबंध में सीबीईओ जहाजपुर शिखा राणा ने कहा कि विद्यालय में अशोभनीय और फुहड़ गानों पर आयोजित कार्यक्रम को गंभीरता से लिया गया है और दोषी अध्यापकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। हालांकि अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या केवल नोटिस से शिक्षा के मंदिर की गरिमा लौट पाएगी।




