देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि श्री 108 वैराग्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर जी महाराज के सानिध्य में आष्टानिका महापर्व के पांचवे दिन 128 अर्घ समर्पित किये गए। मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि श्री सिद्धचक्र मंडल विधान में कुल वलय (भाग) होते हैं, जिनमें पाँचवें वलय (पंचम भाग) में 128 अर्घ होते हैं और इसमें 108 प्रकार के पापाश्रव (पाप के आने के मार्ग) के निवारक अर्घ समाहित होते हैं। यह भाग जीव को पाप कर्मों से बचाने और आत्मशुद्धि की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर प्रथम अभिषेक ,शांति धारा, मुनि श्री के पाद प्रक्षालन ओर शास्त्र भेंट शांति लाल जी ,राजेश कुमार जी, कमलेश पाटनी परिवार ने किया। विधान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान जिनेन्द्र देव की आराधना की तथा विश्व शांति, समाज की उन्नति एवं समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलकामना की।





