खरपतवारनाशी के प्रयोग पर एक व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि महाविद्यालय, देवली के सस्य विज्ञान विभाग द्वारा तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए धान की फसल में पोस्ट-इमर्जेन्स (पश्चात् उद्भव) खरपतवारनाशी के प्रयोग पर एक व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को धान की फसल में खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराना तथा उनके व्यावहारिक ज्ञान एवं कौशल का विकास करना था। प्रशिक्षण के दौरान सस्य विज्ञान प्रभारी राजू लाल धाकड़ एवं डॉ. बी. एस. मीणा ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय के प्रायोगिक खेत में ले जाकर धान की फसल में उगने वाले विभिन्न प्रकार के खरपतवारों की पहचान कराई तथा उनके कारण फसल की वृद्धि एवं उत्पादन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट-इमर्जेन्स खरपतवारनाशी 2,4 Di or इथाइल एस्टर के सही चयन, अनुशंसित मात्रा, घोल तैयार करने की विधि, स्प्रेयर के अंशांकन (कैलिब्रेशन) तथा उचित समय पर छिड़काव की वैज्ञानिक तकनीक का प्रदर्शन भी किया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को खरपतवारनाशी के सुरक्षित एवं संतुलित उपयोग, व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी आवश्यक सावधानियों से भी अवगत कराया गया। साथ ही समेकित खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management) के महत्व पर विशेष प्रकाश डालते हुए बताया गया कि समय पर खरपतवार नियंत्रण करने से धान की फसल की बढ़वार बेहतर होती है तथा उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है। विद्यार्थियों ने स्वयं खेत में पोस्ट-इमर्जेन्स खरपतवारनाशी का छिड़काव कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया तथा स्प्रेयर के सही संचालन एवं छिड़काव की वैज्ञानिक विधि को समझा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विभिन्न तकनीकी पहलुओं से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंत में सस्य विज्ञान प्रभारी राजू लाल धाकड़ ने विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार खरपतवार प्रबंधन करने तथा कृषि में सुरक्षित एवं संतुलित रसायन उपयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में दक्ष एवं सफल कृषि विशेषज्ञ बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

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