देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। आज की राजनीति में निष्ठावान व पार्टी के लिए वर्षो से दिन रात मेहनत करते आ रहे कार्यकर्ताओ पर चापलूस किस्म के नए नवेले कीटाणु भारी पड़ने लग गए। जिस पार्टी की ईमानदारी व कर्मठ कार्यकर्ता के जमीर की शान ही पहचान हुआ करती थी वो आज चंद जयचंदो व लक्ष्मीपतियो के इशारों की कठपुतली बन कर रह गई है। यंहा टिकिट अब ईमान व मेहनतकश कार्यकर्ताओ को नही बल्कि दिखावे व जेब से भारी चापलूसों को मिलने लग गए है। संघ द्रष्टिकोण की बातें अब भाजपा पार्टी को रास नही आ रही है। लक्ष्मी की खनक सैध्दांतिक विचारों पर भारी पड़ने लगी है। जिस राकेश ओसवाल ने पार्टी की सेवा के खातिर ना दिन देखा ना रात…उसको आखिर पार्टी ने क्या इनाम दिया। उसको हर बार टिकिट के नाम पर मिले तो सिर्फ आस्वाशन…..जबकि अपनी जेब से खर्चा करके भी पार्टी के कार्यो में गर्मजोशी से पवित्र निष्ठा के साथ सेवा में लगे रहने वाले राकेश ओसवाल को केवल एक मजलूम की भांति समझा गया। पूंजीपतियों ने उसे हमेशा एक खिलोने की भांति उपयोग किया व अपना काम निकलने के बाद छोड़ दिया। ऐसी सूरत में राकेश ओसवाल व इन के जैसे अन्य निष्ठावान कार्यकर्ताओ को मजबूर होकर वर्षो से भाजपा का दामन थामे रहने के बावजूद अन्य पार्टी का सानिध्य स्वीकार करना पड़ा।





