पुजारी की दृढ़संकल्प व आस्था यम की मंशा पर पड़ी भारी,ठा.रामसिंह शक्तावत ने सकुशल लौटकर तुड़वाया प्रभु के सेवक का उपवास।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। भगवान के प्रति सच्ची आस्था व विस्वाश हो तो क्या कुछ संभव नही हो सकता ये बात आज सिद्ध हो गई। जी,हाँ जीमन जीम रहे श्रद्धेय राजकुमार शर्मा पावर हाउस देवली में पहले शंकर भगवान के पुजारी है अब सांवलिया सेठ बिराजमान होने के बाद हरि और हर,हरि हर के पुजारी हो। निर्माणाधीन श्री सांवलिया सेठ मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ठाकुर रामसिंह शक्तावत ने बताया कि इन पंडित जी से जान पहचान लगभग पंद्रह बीस साल पुरानी होगी क्योंकि सावन माह में भोले नाथ के जल चढ़ाने वही जाता था और अब सांवलिया सेठ के पधारने के बाद लगभग रोज़ मंदिर में नजरो से या मुंह से बोलकर अभिवादन दोनों तरफ़ से होता है कई बार यह भी नहीं होता बस हरि हर के दर्शन कर मंदिर से निकल जाता हूँ और मेरी आदत है मंदिर में किसी की तरफ़ देखने से व बात करने से भी बचता हूँ मेरा ध्यान प्रभु के स्मरण में ही रहता है। कुल मिलाकर ये ब्राह्मण व पुजारी होने व मेरा भगवान का श्रद्धालु से ज़्यादा रिस्ता नहीं है। मगर नया अध्याय 30 अगस्त को साढ़े तीन बजे मुझे हार्ट अटैक का मेडिकल जाँच उपरांत पता चला और खबर इन पंडित जी तक भी पहुँची इन्होंने मुझे नहीं मालूम यह सब क्यों किया तुरंत साँवलिया सेठ के सामने खड़े होकर प्रण लिया की जब तक राम सिंह बना ठीक होकर यहाँ नहीं आ जाते में अन्न त्याग करता हूँ उनके आने पर मंदिर में ही दाल बाटी बनाकर आपको भोग लगाऊँगा में अन्न ग्रहण करूँगा। पंडित जी पूरे दिन भगवान की तरह तरह की भक्ति कर जतन करते रहे और आज में गुरुवार को तीन बजे इटरनल हॉस्पिटल जयपुर से साढ़े पाँच बजे सीधा मंदिर प्रभु के दर्शन करने पहुँचा और पाँच दिन से स्नान नहीं करने की वजह से सीधा घर स्नान कर वापस अपनी बड़ी बहन व पुत्री को लेकर सांवलिया सेठ मंदिर पहुँचा और पंडित राजकुमार शर्मा ने मेरे परिवार के सामने अन्न ग्रहण किया। शक्तावत ने कहा कि यह पल मेरी जिन्दगी के महानतम समय में था क्योंकि इससे बड़ी पूंजी में कमा नहीं सकता । पंडित जी आपने मेरे जीने का मकसद ही बदल दिया। मेरी जो स्थिति थी शायद सभी लोगो ने आश छोड़ दी थी पर मुझे सांवलिया सेठ पर विश्वास था। मैंने सेठ जी को तीन चार माह पहले से ही कह रखा था की सेठ जी में आपको मंदिर में बिराजमान कर दु इसके बाद जब चाहे बुला लेना और एंबुलेंस में भी यही प्रार्थना की में आपके मंदिर में बिराजमान होने के बाद सीढ़ियों पर बैठ कर इतराउ बस तीन माह का समय दे दो। पर आज फिर बार बार रो रहा हूँ और बार बार एक ही ख्याल आ रहा है में अपनी भक्ति से बचा या एक ब्राह्मण के द्वारा लिए प्रण से मुझे लगता है ब्राह्मण की शक्ति और आशीर्वाद ने मुझे नया जीवन मिला है।शायद ये भी प्रभु की ही लीला रही होगी।

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