भगवान् के चरणों में आने वाला पतित व्यक्ति भी पावन बन जाता है:- महाराज श्री।
देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा जो धर्म के बन्धन में रहता है, वह महान् पद को प्राप्त कर लेता है। मुनि श्री ने कहा कि भगवान् जन्म जरा मृत्यु से स्वतंत्र होने का मार्ग प्रशस्त करते है। यह स्वतंत्र आत्मा को सदा सुख-शान्ति प्रदान करती है। स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छन्दता नहीं है। आज के व्यक्ति का जीवन अनुशासन से रहित होने के कारण कष्टप्रद हो रहा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अनुशासन में रहने की आवश्यकता है। अनुशासन में रहने वाली नदी महासागर बन जाती है, अनुशासन-हीन नदी स्वयं बर्बाद हो जाती है और दूसरों के जीवन में भी बर्बादी ला देती है। उसी प्रकार अनुशासन में रहने वाला व्यक्ति भी महापुरुष बन जाता है। अनुशासनहीन व्यक्ति स्वपर के जीवन को संकट में डालता है। भगवान् के चरणों में आने वाला पतित व्यक्ति भी पावन बन जाता है। धर्म सभा में मुनि वैराग्य सागर महाराज ने कहा कि पर्व के दिन आत्मा साधना के लिए होते है। जो व्यक्ति रात्रि में चारों प्रकार के आहार का त्याग करता है, उसे एक माह में पन्द्रह दिन के उपवास के बराबर फल की प्राप्ति होती है। शरीर तो काणे गन्ने के समान है। काणे गन्ने को खाने से कुछ भी रस नहीं मिलता है, पर उसे उपजाऊ भूमि में बो देते हैं, तो वह रसदार गन्ना बन जाता है। वैसे ही शरीर को इन्द्रिय विषय भोग में लगाते है, तो कुछ भी नहीं मिलता है, उसे शरीर को धर्म ध्यान में लगा देते हैं, तो शाश्वत सुख की प्राप्ति हो जाती है।








