देवली बाजार लाचार,बाहरी व्यापारी गुलजार,व्यापारियों के ठेकेदार ले रहे राजनीतिक लाभ।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। विगत 3 वर्षों से देवली बाजार की स्थिति दिन ब दिन बिगड़ती ही जा रही है दुकानदार ग्राहकों का इंतजार कर रहे है वही बाहरी फिरंगी व्यापारी हटवाड़े लगाकर चांदी कूट रहे है। एक समय देवली के बाजार में इतना काम था दुकानवालो को फुर्सत नही होती थी फिर बाजार पर काला साया पड़ा तो डूब क्षेत्र की वजह से वित्तिय गांव देवली बाजार से कट के कैकड़ी की तरफ जुड़ गए फिर धीरे धीरे देवली कृषि उपज मंडी के देवली बाजार से बाहर जाने से बाजार में ओर ज्यादा वीरानी छा गयी। फिर धीरे धीरे किराना ओर इलेक्ट्रॉनिक बाजार को बड़े बड़े मॉल ने निंगल लिया। कल तक जो देवली बाजार कपड़े में सर्वश्रेष्ठ बाजार था उसको इन हटवाड़ा दुकान वालो ने समाप्त कर दिया। सुनने में आ रहा है आने वाले समय मे एक कपड़े का भी बड़ा मॉल बनने वाला है जो सस्ता माल लुटा कर रेडीमेड व्यापार की भी कब्र खोद देगा।

अब देवली व्यापारियों की ये स्थिति ये है कि जंगल के शिकारी की तरह दिन भर दुकान पर ग्राहकों का इंतजार करते रहते है। बड़ी विकट स्थिति है कि ज्यादातर दुकान वालो के तो किराए निकालने के भी फोड़े पड़ रहे है। हालांकि होने को तो देवली में दो दो व्यापार महासंघ है। जो कि व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबध्द है। फिलहाल तो स्वयं के हितों को ही प्राथमिकता दिए बैठे है। दोनों ही महासंघ इस समस्या पर आंखे मूंदे बैठे है। देखते है अब कब देवली का बाजार गुलजार होगा। हालात ऐसे ही बने रहे तो स्थानीय व्यापारियों को कंगाली के दलदल में जाने से कोई नही बचा पायेगा। हालांकि व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए जी-जान लुटा देने वाला एक मशीहा हुआ था। उनका नाम था चांदमल जैन।

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