आर्थिक विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य दोनों एक सिक्के के दो पहलू:-सुमन मीणा।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। शनिवार को राजकीय महाविद्यालय देवली में राष्ट्रीय सेवा योजना की दोनों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय विशेष शिविर का छठा दिवस प्रार्थना सभा के साथ योग और प्राणायाम से शुरु हुआ। इसके उपरांत कार्यक्रम अधिकारी राम प्रसाद चौधरी और रविंद्र कुमार जांगिड़ के नेतृत्व में एजेंसी एरिया में एक नुक्कड़ नाटक भी करवाया गया। जिसका विषय था “सोशल मीडिया के दुष्परिणाम”। इस नाटक से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें जितना हो सके उतना मोबाइल से दूर रहना चाहिए और अपने आसपास के वातावरण और अपने माता-पिता और अपने दादा-दादी उनके साथ अपने बड़े बुजुर्गों के साथ समय बिताना चाहिए और उनके अनुभवों को जानना चाहिए।

जो हम उनसे जान सकते हैं वह हमारे मोबाइल से नहीं जान सकते इसलिए हमें सोशल मीडिया का उपयोग कम से कम करना चाहिए और अपने बाहरी अनुभव पर ध्यान देना चाहिए। इसी क्रम में बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया जिसके मुख्य वक्ता महाविद्यालय की सहायक आचार्य सुमन मीणा रही उनका व्याख्यान ‘सतत विकास और मानसिक स्वास्थ्य’ विषय पर था। आर्थिक विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। मानसिक स्वास्थ्य का तात्पर्य हर समय खुश रहना नहीं है अपितु किस तरीके से आप अपनी परिस्थितियों और समस्याओं का हल करते हैं। उनसे मानसिक स्वास्थ्य विकास को काफी फर्क पड़ता है। जैसे कि अगर व्यक्ति परेशान रहता है, चिड़चिड़ा रहता है और मानसिक रूप से अपने आप को कमजोर व्यक्त करता है जिसके कारण कौशल विकास को बाधा पहुँचती है फलस्वरूप अर्थव्यवस्था को सीधा नुकसान पहुँचता है। इस सत्र में महाविद्यालय के संकाय सदस्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. वंदना यादव, डॉ प्रियंका जैन, निशा मीना आदि उपस्थित रहे।

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