“दांडी मार्च” स्मृति स्मारक पर पुष्पांजलि, माल्यार्पण किया।
देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। अहिंसात्मक दांडी यात्रा, जिसे ‘नमक सत्याग्रह’ भी कहा जाता है, महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 तक ब्रिटिश नमक कानून के विरुद्ध किया गया एक ऐतिहासिक अहिंसक आंदोलन था। साबरमती आश्रम से दांडी (गुजरात) तक 24 दिनों की 387 किमी की पैदल यात्रा के बाद, गांधीजी ने 6 अप्रैल को नमक बनाकर सविनय अवज्ञा आंदोलन का आगाज़ किया। मीडिया प्रभारी राजीव जैन ने जानकारी में बताया कि आज ही के दिन 12 मार्च 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में ब्रिटिश नमक कानून के खिलाफ गुजरात के साबरमती आश्रम से अहिंसात्मक दांडी यात्रा की शुरूआत कर पुरे देश में अलख जगाई थी।यह आन्दोलन स्वतंत्रता संग्राम में मील का पत्थर साबित हुई। आंदोलन में शामिल स्वतंत्रता संग्रामी सेनानीयों की स्मृतियों में नगर कांग्रेस कमेटी देवली द्वारा आज सुबह 11 बजे नगर पालिका के पास “दांडी मार्च” स्मृति स्मारक पर पुष्पांजलि, माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देते हुए योगदान को याद किया। इस अवसर पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ जिंदल, टीकम चंद सेन, शम्मी रंगरेज, दिनेश जैन,राजीव जैन, पंकज नथैया, रोहित चंदेल, पंकज नथैया, राजू पाठक,राजू ग्वाला, इस्तुकार अली, राजेन्द्र चांवरिया आदि कांग्रेस जन उपस्थित रहे।

दांडी यात्रा के मुख्य बिंदु:
शुरुआत और नेतृत्व: 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से यह यात्रा शुरू की।
उद्देश्य: ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर लगाए गए एकाधिकार और टैक्स के खिलाफ विरोध करना। नमक भारतीयों के लिए एक आवश्यक वस्तु थी, जिस पर अंग्रेज कर लेते थे।
यात्रा का विवरण: गांधीजी हर दिन लगभग 16-19 किलोमीटर चलते थे। रास्ते में भारी जनसमर्थन मिला और यह कारवां लाखों लोगों का समूह बन गया।
कानून तोड़ना: 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर गांधीजी ने समुद्र के किनारे नमक उठाकर ब्रिटिश कानून को तोड़ा।



