नव संवत्सर पर शिक्षक शक्ति का संकल्प, संस्कारयुक्त शिक्षा से राष्ट्र निर्माण का आह्वान।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) जिला शाखा टोंक द्वारा नव संवत्सर 2083 के उपलक्ष्य में भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन 19 मार्च को माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर, देवली में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें संगठन के प्रदेश, संभाग, जिला एवं उपशाखा स्तर के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष दिनेश चंद्र कुर्मी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद पुष्करणा तथा विशिष्ट अतिथियों में लक्ष्मीकांत पारीक (खंड संचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, देवली), नौरंग सहाय (प्रदेश संयुक्त मंत्री), दिनेश कुमार शर्मा (संभाग उपाध्यक्ष), जितेंद्र सिंह (विभाग संगठन मंत्री), चन्द्र प्रकाश कुर्मी (प्रदेश मीडिया प्रभारी), जगदीश लाल गुर्जर (संभाग संयुक्त मंत्री), महेश शर्मा, देवराज सिंह (प्रार्थना सभा प्रकोष्ठ) सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। मंच संचालन जिला मंत्री भंवरलाल वैष्णव द्वारा किया गया।
पंचांग, परंपरा और वैज्ञानिक कालगणना पर विशेष बल प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद पुष्करणा ने अपने उद्बोधन में भारतीय पंचांग की वैज्ञानिकता एवं प्राचीनता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें अंग्रेजी मानसिकता से मुक्त होकर भारतीय कालगणना एवं संस्कृति को अपनाना चाहिए। उन्होंने वर्ष प्रतिपदा के महत्व, ऋतु परिवर्तन, युग परिवर्तन तथा भारतीय परंपराओं की वैज्ञानिकता को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज परिवर्तन का आधार है और विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण का तीर्थ होना चाहिए। शिक्षक का धर्म केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि राष्ट्रभावना, नैतिकता और संस्कारों का संचार करना भी है। पदोन्नति, स्थानांतरण एवं वेतन विसंगतियों पर चर्चा प्रदेश अध्यक्ष ने शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आश्वस्त किया कि लंबित पदोन्नतियां शीघ्र ही की जाएंगी तथा स्थानांतरण के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2026 से नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू करवाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सेकंड ग्रेड, कंप्यूटर अनुदेशक एवं मंत्रालयिक कर्मचारियों के स्थानांतरण 31 मार्च तक किए जाने की संभावना है। साथ ही, पदोन्नति एवं स्थानांतरण की प्रक्रिया ग्रीष्मावकाश के दौरान पूर्ण करवाने हेतु सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए संगठन लगातार अधिकारियों एवं सरकार से संवाद कर रहा है और शीघ्र समाधान का विश्वास दिलाया गया। टीईटी पात्रता परीक्षा से संबंधित मुद्दों पर भी शिक्षकों को राहत दिलाने के लिए प्रयासरत रहने की बात कही गई। इसके अतिरिक्त, ग्रीष्मावकाश में अवकाश कटौती के प्रस्तावों पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया गया कि यदि शिक्षकों के अवकाश में कटौती की जाती है तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। संस्कारयुक्त शिक्षा और सामाजिक दायित्व का संदेश कार्यक्रम में वक्ताओं ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु संस्कार, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। “एक विद्यार्थी—एक वृक्ष”, “प्लास्टिक मुक्त विद्यालय”, “धूम्रपान निषेध” एवं “स्वदेशी अपनाओ” जैसे संकल्पों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया गया।
लक्ष्मीकांत पारीक ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से नव पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति और संस्कारों से जोड़ने का आग्रह किया। संगठन विस्तार एवं सदस्यता लक्ष्य
जिला अध्यक्ष दिनेश चंद्र कुर्मी ने संगठन की सदस्यता अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि गत सत्र में 7300 से अधिक सदस्यता पूर्ण की गई है तथा आगामी सत्र 2026-27 में 8000 सदस्यता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत बनाने हेतु सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। शिक्षक—परिवर्तन के वाहक कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुख रूप से उभरकर आया कि शिक्षक ही समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। यदि शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वहन राष्ट्रहित और संस्कारों के साथ करता है, तो एक सशक्त, स्वस्थ और विकसित भारत का निर्माण संभव है। अंत में भारत माता के जयघोष, राष्ट्रभक्ति गीतों एवं सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ।

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