देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर देवली के तत्वावधान में प.पू. भारत गौरव श्रमणी गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ सानिध्य में प.पू. गणाचार्य 108 श्री विराग सागर जी महामुनिराज के 64 वें अवतरण दिवस एवं प.पू. पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महामुनिराज के प्रथम पट्टाचार्य महोत्सव के पावन अवसर पर श्री जिनसहस्रनाम महाअर्चना का भव्य आयोजन सानंद सम्पन्न हुआ। अध्यक्ष संजय जैन , प्रवक्ता अंकित जैन डाबर एवं प्रतीक सेठी ने बताया की इस विधान में सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य – अपेक्षा अजमेरा, यज्ञनायक – महावीर अजमेरा, कुबेर इन्द्र – राजकुमार अजमेरा, ईशान इन्द्र – ओम जी शाह, सानत इन्द्र राजकुमार कोठारी एवं माहेन्द्र इन्द्र मनोज बिलाला को प्राप्त हुआ। प्रारम्भिक क्रियाओं में अभिषेक, रक्षीकरण, द्रव्य शुद्धि, जल शुद्धि की गई। वज्रपंजर रक्षा कवच के साथ सभी भक्तों को मंत्रित किया गया। तत्पश्चात सभी भक्तों ने भक्तिभावों के साथ नवदेवता पूजन एवं सहस्रनाम पूजन सम्पन्न की। पूज्य गुरुमाँ के मुखारविंद से 1008 मंत्रों का पवित्र उच्चारण के साथ 11 शांतिधारा संपन्न हुई। इसी के साथ 48 ऋद्धि मंत्रों का जाप एवं अर्घावलि की गई। मण्डल पर 1008 बादाम एवं 11 श्रीफल, 11 दीपक चढ़ाकर भगवान की स्तुति की गई। पूज्य माताजी ने इस जिनसहस्रनाम भक्ति का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं से कहा कि “भक्ति से ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। संकटों के समय आचार्य भगवंतों ने भी इसी भक्ति का अवलम्बन लेकर निर्विकल्प अवस्था को प्राप्त किया। तात्कालिक फल को देने वाली यह भक्ति अनेकों भव्यों को उत्तम फल देने में सिद्ध हुई है। जीवन की गतिविधियों में विघ्न डालने वाला अंतराय कर्म मनुष्य को दुःखी कर देता है। इन संकटों से, दुःखों से दूर होने का एकमात्र उपाय यह चमत्कारिक सहस्रनाम की भक्ति है। पूज्य माताजी ने कहा कि इसी भक्ति को जपते-जपते कई रुष्टसर्गों से मुक्ति पायी है। कहते हैं आस्था से ही रास्ता मिलता है। जीवन के रास्ते से संकट, दुःख रूपी काँटे-कंकड़ आदि निकाल फेंकना है तो आस्था रूपी गाड़ी में बैठकर मोक्ष रूपी मंजिल को प्राप्त करो।” इस विधान से कई इतिहास बन चुके हैं। इस भक्ति का डंका सिर्फ भारत में ही नहीं विदेशों में भी बज रहा है। माताजी ने जो भक्ति के द्वारा धर्म प्रभावना की वह सचमुच ऐतिहासिक है। सभी भक्तों ने झूमते-नाचते हुए प्रभु भक्ति में तल्लीन होकर सम्पन्न किया। अध्यक्ष संजय जैन ने बताया की आचार्यश्री के 64 वें अवतरण दिवस पर* सभी भक्तों ने गुरु पूजन सम्पन्न की। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। शाम को गुरुमाँ के द्वारा रचित णमोकार दीपार्चना सम्पन्न हुई। जिसमें 35 परिवारों ने 35 दीपक चढ़ाकर चमत्कारिक णमोकार महामंत्र की आराधना सम्पन्न की। तत्पश्चात 64 दीपकों से आचार्य भगवन की महाआरती संगीतकार सत्येन्द्र जैन के सुरस्वरों से सम्पन्न की गई। प्रतीक जैन सेठी ने बताया की *आगामी 3 मई 2026 को* श्रमणी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी का *15 वें गणिनी पदारोहण दिवस महोत्सव* की तैयारियां बड़े उमंग के साथ चल रही हैं। सकल दिगम्बर जैन समाज देवली के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सहभागिता निभाकर धर्मलाभ लें।






