श्रीकृष्ण माखन चोरी के माध्यम से गोपियों का लोभ व अहंकार चुराते थे :-कथावाचक अभिनव पाराशर।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। उपखंड के दूनी कस्बे के पास ही स्थित बहु विख्यात जन जन की आस्था के केंद्र काला नाडा बालाजी महाराज मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक पंडित अभिनव पाराशर ने पंचम दिवस श्रीमद्भागवत कथा के दौरान गोवर्धन पूजा करवाया व भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किया। कथा वाचन में बताया कि भगवान कृष्ण ने इंद्र का मान-मर्दन करने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। इस दौरान उन्होंने सात दिनों तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था, जिसके बाद माता यशोदा ने 56 भोग लगाए, तभी से यह परंपरा प्रचलित है। कथा के दौरान माखन चोरी, गोवर्धन लीला और कालिया नाग दमन के प्रसंग भी सुनाए गए। प्रसंग में बताया कि भागवत कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं (माखन चोरी, मट्टि भक्षण, पूतना वध, ऊखल बंधन) भगवान के वात्सल्य प्रेम और दिव्य स्वरूप को दर्शाती हैं। ये लीलाएं गोकुलवासियों को आनंद देने और कंस के अत्याचारों के अंत की शुरुआत थीं, जिसमें माखन चोरी के माध्यम से वे गोपियों का लोभ व अहंकार चुराते थे। भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया, जिसमें ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की’ भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। ब्रज के समान ही कथा पंडाल में श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकी सजाकर, पुष्प वर्षा और बधाई गीत गाकर उत्सव मनाया गया, जो भक्ति और हर्षोल्लास का प्रतीक बना।

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