देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। देवली बाजार बना हुआ है मिलावटी खाद्य सामग्री का बड़ा बाजार सब अफसरों को अवगत होने के बावजूद जबरदस्त तरीके से पनप रहा मिलावटी व्यापार। सस्ता बिकने वाला घी हो तेल हो मिठाई हो या खुला बिकने वाला मसाला सब मिलावट की जद में है हैरानी की बात तो ये है कि फूड अफसरों की नज़रों के सामने जबरदस्त तरीके से ये कारोबार फल फुल रहा है। लेकिन करवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती रही है। खुले सामानों से ज्यादा सेम्पल तो पेकिंग कम्पनी के सामानों के भरे जाते है और वो सेम्पल पास हुए या फेल ना तो ये पता चलता है और फेल होने के बावजूद उस सामानों को प्रतिबंधित नही किंया जाता है धड़ल्ले से वो सामान बाजारों में बिकता रहता है इस कारण फूड सेम्पल अफसरों की नाममात्र की कार्यवाही भी सवालों के घेरे में है. बाजार में दबी आवाज में ये सुना जाता है की देवली का बाजार अफसरों के लिए एक उपजाऊ भूमि है जैसे उपजाऊ भुमि फसल लहलहाती है वैसे ही अफसरों की बैंक खातों की फसल बढ़ती रहती है. हर अफसर चाहता है की उसकी नियुक्ति देवली में हो ताकि वो आराम से नोकरी करता रहे क्योकि देवली की जनता सहने की आदी हो चुकी है वो गलत के लिए आवाज भी नही उठाना चाहती है। यहां तक सुनने में आता है की अफसरों की कार्यवाही से पहले ही मिलावटी व्यापारियों को सूचना मिल जाती है अफसरों के आने की तो पहले से ही मिलावटी सामान को हटा लिया जाता है तो ये कार्यवाही भी सवालों के घेरे में है की ये खबर उनके पास पहुच कैसे जाती है फिर कैसे मिलावटी सामानों के सेम्पल भरे जाएंगे। समय समय पर मीडिया समस्या को उठाता है लेकिन बिना जनता की आवाज के सहयोग मीडिया की आवाज भी अफसरों की फाइलों की तरह दब जाती है। मीडिया तो अपनी जवाबदेही निभाता है लेकिन ये भी जनता की आवाज ओर विरोध के बिना अधूरी है। खुले आम आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा लगता है । शुद्धता तो सिर्फ अब सुनने को रह गयी है। व्यापारी थोड़े से लालच के लिए आम जनता को मौत के मुह में धकेलने में लगे है। जब पूरे राजस्थान में फूड सेफ्टी अफसरों की कार्यवाही हो रही है मिलावटी सामानों को प्रतिबंधित किया जा रहा है तो देखना होगा की टोंक की नवीन कलेक्टर महोदया टीना डाबी की देवली के इस मिलावटी बाजार पर कब नजर पड़ती है और विस्तार स्तर पर कार्यवाही होती है या फिर से अफसरों की खानापूर्ति वाली ही कार्यवाही होगी।







