बंथली ग्राम पंचायत के गाँव विजयगढ़ में सादगीपूर्ण विवाह बना सामाजिक मिसाल।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। बिना दहेज केवल एक रुपया व नारियल लेकर सम्पन्न हुआ विवाह। हुआ यूं कि देवली क्षेत्र की ग्राम पंचायत बंथली के गाँव विजयगढ़ में एक अत्यंत प्रेरणादायक और समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण सामने आया है। गाँव विजयगढ़ निवासी एवं पूर्व सरपंच छगनलाल मीणा ने अपने पोत्र दीपक मीणा (पुत्र स्वर्गीय गोपाल मीणा) का विवाह खुशबू मीणा (पुत्री स्वर्गीय राधेश्याम मीणा, निवासी नयागांव रानीपुरा) के साथ दिनांक 25 अप्रैल 2026 को अत्यंत सादगी, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों के साथ सम्पन्न कराया। इस विवाह की विशेषता यह रही कि वधू के पिता स्वर्गीय राधेश्याम मीणा का पूर्व में ही देहांत हो चुका था, जिससे परिवार पहले से ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। ऐसे समय में सामान्यतः दहेज, लेन-देन और परंपरागत रस्मों का सामाजिक दबाव बढ़ जाता है, लेकिन छगनलाल मीणा ने इन सभी कुरीतियों को दरकिनार करते हुए एक सकारात्मक और साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने विवाह में किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं किया और न ही किसी प्रकार का दिखावा किया गया। परंपरागत रस्मों को भी सरल बनाते हुए केवल एक रुपया और नारियल लेकर बहू को अपने घर लाया गया। यह पहल न केवल सादगी का प्रतीक है, बल्कि दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी है कि विवाह जैसे पवित्र बंधन को आर्थिक लेन-देन से जोड़ना उचित नहीं है। विवाह समारोह अत्यंत सादगीपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ, जिसमें परिवारजनों और ग्रामीणों की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह की रस्में पूरी की गईं। बिना किसी आडंबर के सम्पन्न हुआ यह विवाह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों एवं क्षेत्रवासियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कदम समाज में नई सोच और सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत करते हैं। उनका मानना है कि यदि समाज के जागरूक लोग इस प्रकार की पहल करें तो दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है और बेटियों को सम्मानपूर्वक जीवन की नई शुरुआत दी जा सकती है। ग्राम पंचायत बंथली के वर्तमान सरपंच एवं प्रशासक श्याम सिंह राजावत ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि छगनलाल मीणा का यह कार्य पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब दहेज प्रथा कई परिवारों के लिए आर्थिक और मानसिक बोझ बनी हुई है, ऐसे में इस प्रकार का सादगीपूर्ण विवाह समाज को एक नई दिशा देने वाला है। राजावत ने आगे कहा कि इस प्रकार के उदाहरणों को व्यापक स्तर पर प्रचारित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे प्रेरणा लें और समाज में समानता, सम्मान और सादगी की परंपरा को मजबूत किया जा सके। यह विवाह केवल एक पारिवारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि सामाजिक जागरूकता का एक सशक्त संदेश बनकर उभरा है। छगनलाल मीणा द्वारा प्रस्तुत यह उदाहरण आने वाले समय में निश्चित रूप से अन्य परिवारों को भी दहेज मुक्त एवं सादगीपूर्ण विवाह करने के लिए प्रेरित करेगा।

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