देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (रेसा) के बैनर तले शिक्षकों एवं प्रशासनिक संवर्ग की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को लेकर देवली ब्लॉक इकाई द्वारा मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम 22 सूत्रीय मांग-पत्र उपखंड अधिकारी देवली को सौंपा गया। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में शिक्षा सेवा संवर्ग आंदोलन के लिए विवश होगा। रेसा ने कहा कि शिक्षा विभाग राज्य का सबसे बड़ा विभाग होने के बावजूद इसके प्रशासनिक ढांचे में समयानुकूल सुधार नहीं होने से अधिकारियों एवं विद्यालयों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि प्रदेश में लगभग 19 हजार प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी के 534, उपनिदेशक के 67, संयुक्त निदेशक के 18 तथा अतिरिक्त निदेशक के मात्र 3 पद ही स्वीकृत हैं। इस असंतुलन के कारण प्रधानाचार्यों के लिए पदोन्नति के अवसर अत्यंत सीमित हो गए हैं। परिषद ने मांग की है कि प्रधानाचार्य एवं जिला शिक्षा अधिकारी के मध्य एक नवीन पदोन्नति पद का सृजन किया जाए। संगठन का तर्क है कि राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाले बिना वरिष्ठ विद्यालयों, पीईईओ, उपनिदेशक एवं अन्य पदों के उन्नयन से नए पद सृजित किए जा सकते हैं। रेसा ने विभाग में प्रशासनिक पदों की संख्या बढ़ाने, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर अतिरिक्त निदेशक स्तर तक नए पदों के सृजन तथा संवर्ग पुनर्गठन की मांग की है। साथ ही वर्ष 2026-27 की लंबित डीपीसी शीघ्र आयोजित करने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने नवगठित जिलों में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी , अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक एवं डाइट कार्यालयों की शीघ्र स्थापना और पद स्वीकृति की आवश्यकता भी बताई। रेसा ने केंद्र सरकार के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की तुलना में राज्य के प्रधानाचार्यों का वेतनमान बढ़ाने की मांग की। संगठन ने कहा कि पीईईओ एवं यूसीईईओ के रूप में कार्यरत प्रधानाचार्यों को अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, इसलिए उन्हें मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता दिया जाए। मांग पूरी नहीं होने पर पीईईओ व्यवस्था के बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई। परिषद ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई सुझाव दिए हैं, जिनमें—
प्रत्येक ब्लॉक में दो नोडल विद्यालय निर्धारित कर वहां अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति।
वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक लंबित विधि अंकन एवं रिव्यू डीपीसी का शीघ्र निस्तारण।
विद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों के लिए अतिरिक्त अकादमिक पदों का सृजन।
निर्माण कार्यों एवं तकनीकी प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपना।
शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करना।
झूठी शिकायतों के आधार पर कार्रवाई रोकने के लिए सुरक्षा नीति लागू करना।
सामान्य प्रशासन विभाग के 14 फरवरी 2023 के परिपत्र क्रमांक 13 को निरस्त करना।
ऑनलाइन कार्यों के लिए विद्यालयों में सूचना सहायक अथवा तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
विद्यालयों में बार-बार आयोजित होने वाली रैलियों, प्रतियोगिताओं एवं अन्य गतिविधियों को सीमित करना।
शिक्षण कार्यों में गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के हस्तक्षेप को सीमित रखना।
परिषद का कहना है कि इन मांगों के पूरा होने से शिक्षा प्रशासन अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बन सकेगा। संगठन ने सरकार से शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी बढ़ाने तथा मांग-पत्र में शामिल बिंदुओं पर संवेदनशीलता के साथ शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। उपखंड अधिकारी देवली को ज्ञापन सौंपते समय रेसा देवली ब्लॉक अध्यक्ष कृष्णगोपाल माली, प्रदेश सह मंत्री राजीव शर्मा, मंत्री महेश खटाणा, दिनेश सिंह नरूका, अशोक चौधरी, राकेश मीणा, प्रह्लाद गुर्जर, उर्मिला मीणा सहित परिषद के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।








