परिजनों के साथ सड़क पर उतरे ग्रामीण, 50 लाख मुआवजा और नौकरी की मांग।

* विद्युत हादसे से धनराज बैरवा की मौत का मामला…

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। क्षेत्र के रघुनाथपुरा में विद्युत निगम कर्मचारियों की लापरवाही का शिकार हुए दुर्गापुरा ढाणी निवासी धनराज बैरवा की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों का सब्र का बांध टूट गया। रविवार सुबह जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उपचार के दौरान धनराज के मौत की सूचना मिलते ही क्षेत्र में मातम के साथ-साथ सिस्टम के खिलाफ भारी रोष फैल गया। न्याय की मांग को लेकर अंबेडकर विचार मंच के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने देवली के डाक बंगला परिसर में एकजुट होकर प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए मंच के अध्यक्ष पांचूलाल मीणा और अन्य कार्यकर्ताओं ने डाक बंगले से नारेबाजी करते हुए उपखंड कार्यालय के समीप रोडवेज बस स्टैंड के प्रवेश द्वार पर पहुंच कर जाम कर दिया। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने विद्युत निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान डीएसपी हेमराज, प्रशिक्षु आरपीएस कुसुम मीणा और थाना प्रभारी दौलतराम गुर्जर सहित पुलिस बल मौके पर पहुंचा। डीएसपी हेमराज ने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि विरोध का यह तरीका जनहित में नहीं है और इससे आमजन को असुविधा हो रही है, यदि आम लोगों का समर्थन चाहिए तो लोगों की सुविधा को ध्यान रखें। जिस पर प्रदर्शनकारी कुछ देर के लिए सड़क से हट गए, लेकिन नारेबाजी जारी रखी। मुकेश मीणा ने स्पष्ट किया कि धनराज के साथ अन्याय हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए वे मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग पर अड़े हैं। बारिश के बावजूद परिजन और ग्रामीण सड़क पर धरना देकर बैठे रहे। उल्लेखनीय है कि गत 2 जून को लाईनमैन के बुलावे पर धनराज विद्युत खंभे पर मरम्मत कार्य के लिए चढ़ा था। उस समय उसे सप्लाई बंद होने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन जीएसएस से अचानक बिजली चालू कर दी गई, जिससे धनराज 11 हजार वोल्ट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया था। उस हादसे में धनराज के दोनों हाथ गंवाने पड़े थे और वह तब से एसएमएस अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। रविवार सुबह करीब 9 बजे उसकी स्थिति बिगड़ने से हुई असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि लाईनमैन की जल्दबाजी और लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग छीन लिया। प्रशासन के आश्वासन के बावजूद अब तक कोई परिणाम न निकलने से आक्रोशित ग्रामीण अब संघर्ष के मूड में हैं और अपनी मांगों को पूरा करने के लिए अड़े हुए हैं। धरना प्रदर्शन के लिए उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर टेंट लगा दिया गया है।

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