वर्धमान सागर जी महाराज का गुणानुवाद करना साक्षात संयम और वात्सल्य की वंदना करने के समान।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। आज आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के 37वे आचार्य पदारोहण मुनि श्री 108 वैराग्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर जी महाराज के सानिध्य में बड़ी धूम धाम ओर भक्ति से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः 8:00 बजे संगीतमय गुरुपूजा एवम गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया हैं जिसमें मुनि श्री 108 वैराग्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का गुणानुवाद करना साक्षात संयम और वात्सल्य की वंदना करने के समान है आचार्य श्री को संपूर्ण जैन समाज में “वात्सल्य वारिधि” (करुणा और स्नेह का समुद्र) कहा जाता है दिगंबर जैन मुनि परंपरा के कठोरतम सिद्धांतों (मूलगुणों) के अक्षुण्ण पालक है वर्तमान में 36 से अधिक साधुओं के विशाल संघ का अनुशासन और कुशलतापूर्वक संचालन करना उनकी नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। कार्यक्रम में चित्र अनावरण मनोहर लाल दिनेश कुमार का कासलीवाल द्वारा किया गया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन शांतिलाल सुरेश कुमार सोनी महावीर प्रसाद सुशील कुमार गोधा डाबर वाले एवं शस्त्र भेंट विनय कुमार महावीर प्रसाद धनराज सांडला वाले एवं डॉक्टर विमल एवं देशबंधु जैन ने किया। इस कार्यक्रम में सकल दिगंबर समाज के लोगो ने भाग लिया।

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