गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। देवली में परम पूज्य मुनि श्री 108 वैराग्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में “विद्या वैराग्य वर्धन वर्षायोग–2026” के अंतर्गत गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। प्रात काल में ही सिद्ध चक्र विधान मंडल का पूर्णावती हुई। इसके बाद चातुर्मास कलश स्थापना का ध्वजा रोहण संजय कुमार निर्मल कुमार काला ने किया। इसके बाद गुरु पूर्णिमा महोत्सव नगर पालिका टीन शेड में प्रारंभ हुआ कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में श्रीफल, पुष्प एवं आरती अर्पित कर गुरु भक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। इसके बाद विद्या वैराग्य वर्धन वर्षायोग का कलश स्थापना का सौभाग्य निर्मल कुमार,प्रदीप, कुमार, हेमंत पाटनी परिवार ने प्राप्त किया। द्वितीय कलश सुरेंद्र कुमार रविंद्र पाटनी, तृतीय कलश महेंद्र कुमार पदम कुमार पाटनी, चतुर्थ कलश इंदर मल अनिल बाकलीवाल पंचम कलश लोकेश कुमार नितेश कुमार सोनी गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर चातुर्मास कलश स्थापना का भव्य आयोजन भी सम्पन्न हुआ। वैदिक एवं जैन परंपरा के अनुरूप मंत्रोच्चार के मध्य कलश स्थापना की गई,। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं परिवारों ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कलश स्थापना के साथ ही आगामी चातुर्मास के धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुनिश्री ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि गुरु जीवन के अंधकार को दूर कर आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। चातुर्मास आत्मचिंतन, संयम, स्वाध्याय, तप एवं धर्म साधना का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर अपने जीवन को संस्कारित बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का आयोजन श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर एवं धर्मशाला ट्रस्ट, देवली के तत्वावधान में एवं सकल जैन समाज, देवली (टोंक) के सहयोग से गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन में धर्ममय वातावरण, भक्ति एवं उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए गुरु चरणों में आशीर्वाद प्राप्त किया और चातुर्मास को सफल बनाने का संकल्प लिया।

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