देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। महात्मा गांधी जीवन दर्शन संस्थान के तत्वावधान में ‘अगस्त क्रांति दिवस’ (भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ) के अवसर पर एक विशेष विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करना और नई पीढ़ी में राष्ट्रीय चेतना जागृत करना था।कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अन्य अमर शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर की। उपस्थित वक्ताओं ने 9 अगस्त 1942 के ऐतिहासिक ‘करो या मरो’ के नारे और भारत छोड़ो आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डाला।इस अवसर पर संस्थान के ब्लॉक संयोजक आकाश कंछल ने अपने संबोधन में कहा, “अगस्त क्रांति हमारे स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक मोड़ थी, जब पूरे देश ने एकजुट होकर अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया था। हमें स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों पर चलकर देश के विकास में अपना योगदान देना चाहिए।”आज के युवाओं को अगस्त क्रांति (भारत छोड़ो आंदोलन) से यह सीख लेनी चाहिए कि देशहित सबसे ऊपर होता है। युवाओं को अन्याय के खिलाफ निडर होकर आवाज उठानी चाहिए, बड़े लक्ष्यों के लिए एकजुट होना चाहिए और देश की एकता व विकास के लिए बिना डरे कठिन मेहनत करनी चाहिए। इस दौरान सत्यनारायण बुलिया , अब्दुल शम्मी , टीकम सेन , राजीव जैन, पंकज नथैया, राहुल सुवालका , गोविंद सेन (पिंटू), राजू ग्वाला, राजू पाठक, सजग खंडेलवाल, दीपक सैनी, नीरज चौधरी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए ।






