तीर्थराज सम्मेद शिखर जी के लिए देवली से 151 यात्रियों का दल हुआ रवाना।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। धर्मनगरी देवली से रविवार को प्रातः 7 बजे जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल सम्मेद शिखर जी के लिये णमोकार मंडल के तत्वावधान में 151 यात्रियों का एक दल रवाना हुआ। इस समूह में 5 साल से 90 साल तक के यात्री यात्रा कर रहे हैं, देवली से बस द्वारा जयपुर एवं जयपुर से ट्रेन द्वारा यह यात्रा संघ सहित 31 तारीख को दोपहर 1बजे तक सम्मेद शिखर जी पहुंचेगी। यह संघ 5 दिन तक वही रहकर विधान एवं पर्वत की वंदना कर के 5 सितम्बर को वापिस वहां से पुनः देवली के लिए प्रस्थान करेगा। णमोकार मंडल के धर्मचंद जैन सांडला एवं ओमप्रकाश जैन टोरडी ने बताया की श्री सम्मेद शिखर जी जैन धर्म का अत्यंत पवित्र और प्रमुख तीर्थक्षेत्र है। इसे पारसनाथ पर्वत भी कहा जाता है। यह झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित है। जैन धर्म के अनुसार यहां से 20 तीर्थंकरों ने इसी पावन पर्वत पर मोक्ष प्राप्त किया था। इसी कारण इसे जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धक्षेत्रों में गिना जाता है। पूरी वंदना लगभग 27–30 किलोमीटर के आसपास मानी जाती है,पर्वत पर जिन स्थानों को तीर्थंकरों के निर्वाण कल्याणक से संबंधित माना जाता है, उन्हें टोंक कहा जाता है। सम्मेद शिखरजी केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि मोक्षभूमि और सिद्धक्षेत्र है। जैन श्रद्धालुओं के लिए इसकी पवित्रता और धार्मिक पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी के साथ विकास जैन टोरडी ने बताया की श्री सम्मेद शिखरजी की कुल यात्रा (चढ़ाई, टोंक वंदना और उतरना मिलाकर) लगभग 27 किलोमीटर (18 मील) की होती है। झारखंड राज्य की सबसे ऊंची पर्वत छोटी है,पर्वत की ऊंचाई यह सबसे ऊंची चोटी (पार्श्वनाथ टोंक) समुद्र तल से लगभग 4,479 फीट (1,365 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ से जैन धर्म के 20 तीर्थंकर सहित करोड़ों मुनियों ने अपनी साधना को साधकर निर्वाण को प्राप्त किया है। यह पूरी श्रृंखला मूलतः जैन धर्मावलम्बीयों द्वारा पूजित रही हे और इसके देख रेख की संपूर्ण जिम्मेदारी भी जैन समाज के ट्रस्ट ही करते हैं । णमोकार मंडल के सदस्यों ने सर्वप्रथम देवली में चातुर्मास के रहे मुनि श्री 108 वैराग्य सागर जी एवं मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर जी महाराज से संघ की सकुशल यात्रा के लिए मंगल आशीर्वाद लिया । इसमें शिखर चंद जैन, सुरेश जैन सावर, जितेंद्र जैन बाजटा, हेमराज जैन घटियाली,एम पी जैन बैंक वाले, राजेश जैन सर्राफ, नोरत जैन थांवला,ज्ञानचन्द जैन खेड़ा,सुनील, लालचंद, प्रशांत, राजेश, सहित कई सदस्य शामिल रहे।

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