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पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का महामहोत्सव प्रारम्भ, उत्तम क्षमा धर्म का हुआ पूजन।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। देवली के विवेकानंद कॉलोनी स्थित पार्श्वनाथ धर्मशाला में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रणीत सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक 105 श्री विधेय सागर जी महाराज के सान्निध्य में चल रहे स्मृति परिवर्तन वर्षायोग-2025 में दस दिवसीय पर्युषण पर्व महामहोत्सव का आयोजन प्रारम्भ हुआ।

इस पर्व के तहत धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं, जिसमें जैन समुदाय के सभी श्रावक अपने आत्मकल्याण की भावना से विशेष व्रत, उपवास, तप एवं त्याग की भावना भाते हुए पूजन करते हैं। पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस पर सर्वप्रथम श्री जी का जुलूस के साथ आयोजन स्थल पर भव्य स्थापना की गई, तत्पश्चात शांतिधारा एवं अभिषेक पूजन की गई। इसी के साथ प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक त्यागिवृतियों द्वारा तत्त्वार्थ-सूत्र के 10 अध्याय का वाचन किया गया। वाचन के उपरांत मुनि श्री ने प्रथम अध्याय का अर्थ बताया कि सम्यक दर्शन, सम्यकज्ञान, सम्यक्चारित्र ही मोक्ष का मार्ग है मिथ्यादृष्टि नहीं। मिथ्यादृष्टि जीव कभी मोक्ष को प्राप्त नहीं कर सकता, उसी के साथ विस्तार से प्रथम सूत्र का अर्थ समझाया।

मीडिया प्रभारी विकास जैन टोरडी ने बताया की प्रथम सत्र में भगवान की प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रकाश चंद, लोकेश जैन चौसला वाले परिवार एवं द्वितीय शांतिधारा का रमेशचंद, नवनीत जैन प्यावड़ी वाले परिवार को प्राप्त हुआ। इसी के साथ उत्तम क्षमा धर्म के प्रथम दिवस पर मुनि श्री का पादप्रक्षालन, चित्रणावरण, द्विपप्रज्वलन, एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य भी प्रथम शांतिधारा परिवार को प्राप्त हुआ। इसी के साथ बताया कि दोपहर के सत्र में दशलक्षण धर्म विधान का आयोजन वाणीभूषण पंडित प्रवर अंकित शास्त्री दमोह एवम संगीतकार अवनीश जैन गुना के निर्देशन एवं संगीतकार अवनीश जैन गुना के निर्देशन में हुआ। प्रथम दिवस पर विधान पुण्यार्जन एवं सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठि सुरेश, रवीश जैन दूनी वाले परिवार को प्राप्त हुआ। इसी के साथ में रात्रि में सांस्कृतिक क्रार्यक्रम का आयोजन प्रशांत जैन खेड़ा वाले के निर्देशन में चन्द्रपभु मन्दिर पाठशाला के बालकों द्वारा आयोजित किया गया।

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