शहर में कोंचिंग माफ़ियाओं का साम्राज्य,नियम कायदे – वायदे ताक में सर्वोपरि इनके फायदे।

* आवासीय कालोनियों की शांति भंग….

* सारे नियम क़ायदों को ताक में रख कर चल रहे हैं कोचिंग सेंटर्स……

* जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता बन रही कारण….

* छात्र छात्राओं से ली जाती है मन माफिक मोटी फीस ……

* शिक्षा के कारोबार ने बनाया लाखों रुपये की संपत्तियों का मालिक…….

*अस्सी फ़ीसदी से अधिक कोचिंग सेंटर्स तो आवासीय मकानों में संचालित…..

 

 

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। देवली शहर में ही नही बल्कि पूरे टोंक जिले में कोचिंग माफ़ियायों ने एक छत्र साम्राज्य स्थापित कर रखा है। ये माफ़िया विधार्थियों के भविष्य की गारंटी देकर अपने ख़ज़ाने भरने की गारंटी ले रहे हैं। छोटे बड़े शहरों में इन माफ़ियायों की अकूत संपत्तियां देखकर ताज़्ज़ुब करना पड़ता है। इनकम टैक्स विभाग की आंखों में धूल झौंक कर ये माफ़िया शिक्षा तंत्र की जड़ों में तेज़ाब डाल रहे हैं। कल तक छोटे मोटे अध्यापक कहलाने वाले लोगों ने इस कारोबार को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है कि जहाँ अच्छे भले भू माफ़िया भी फ़ीके पड़ जाते हैं। बड़े शहरों में तो इन माफ़ियायों के कारोबार ने उनको लाखो रुपये की संपत्तियों का मालिक बना दिया है। एक तरफ कोचिंग माफ़िया तेज़ी से अपना साम्राज्य फैला रहे हैं दूसरी तरफ़ उसी रफ़्तार से छात्र छात्राओं के होस्टल्स माफ़िया भी बिना नियम कायदे अपनाये उनका पीछा कर रहे हैं। यहाँ माफ़िया शब्द मैं जानबूझ कर प्रयोग में ला रहा हूँ। साम दाम दंड भेद से जो कारोबार चलाया जाता है उसे इबादत तो नहीं कहा जा सकता।

इस दृष्टि से शिक्षा से जुड़ा यह कारोबार माफ़ियायों जैसा ही हो चुका है। जिले के हर छोटे बड़े शहरों में कोचिंग क्रांति ने इस तेज़ी से पांव पसारे हैं कि गली कूंचों में कोचिंग कारोबार चलाया जाने लगा है। पिछले 1 साल में राज्य में 20 हज़ार से ज़ियादा कोचिंग सेंटर्स खुल चुके है लेकिन इनमें से 20 फ़ीसदी भी पंजीकृत नहीं। जहां तक सरकारी शर्तों के पालन का सवाल है पंजीकृत संस्थान भी ज़रूरी नियमों का पालन नहीं करते। एक छोटा सा उदाहरण ही देख लीजिए। नियम है कि कोई भी संस्थान राजकीय अवकाश के दिन या राष्ट्रीय त्योहारों पर नहीं चल सकते। संस्थान स्कूलों के निर्धारित समय के बाद ही चल सकते हैं मगर शायद ही कोई संस्थान इन मामूली नियमों का पालन करता हो। बड़े कोचिंग माफ़ियायों की बात न भी की जाए तो भी ज़िले में नब्बे फ़ीसदी कोंचिंग सेंटर्स आवासीय कॉलोनी में चल रहे हैं। तंग गलियों में पूरे दिन बच्चों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे शोर तो होता ही है साथ ही घर की प्राइवेसी भी भंग होती है।


आवासीय कॉलोनी में या घरों में कोचिंग चलने से जहां लोगों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ,वहीं पार्किंग की भी समस्या खड़ी हो रही है। इस पर कॉलोनी के लोगों का कहना होता है कि बच्चे साइकिल और मोटरसाइकिल को रोड पर या गलियों में खड़ी कर देते हैं । लोगों की शिकायत के बाद भी कोचिंग संचालक सुनने को तैयार नहीं होते। जिले के जितने भी शहरों में कोचिंग सेंटर चल रहे हैं वहां छात्र छात्राओं से मन माफिक मोटी फीस तो ली जाती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं होता। एक छोटे हॉल में 50 से 70 छात्र- छात्राओं को पढ़ाया जाता है जहां पर छात्रों को घंटे बैठे रहने के बाद भी ना तो कूलर पंखों की उचित व्यवस्था होती है और नहीं शुद्ध जल की। ना ही पार्किंग की। जबकि नियमानुसार एक छात्र के वैठने के लिए एक वर्ग मीटर जगह होनी चाहिए। कोचिंग इंस्टिट्यूट संचालन के लिए नियमानुसार 3000 स्क्वायर फीट क्षेत्रफल न्यूनतम निर्धारित किया गया है। इस भवन का वाणिज्य या शैक्षणिक भू उपयोग परिवर्तन होना आवश्यक है । मेरा दावा है कि जिले के अस्सी फ़ीसदी से अधिक सेंटर्स तो आवासीय मकानों में संचालित हो रहे हैं ।

इन कोचिंग सेंटरों को व्यवसायिक श्रेणी में आने के कारण श्रम विभाग से भी पंजीयन करना आवश्यक होता है जो अधिकतर कोचिंग क्लासेज के पास नहीं है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार कोचिंग संस्थानों पर भवन विनियमों में संस्थानिक मापदंड लागू होते हैं। इसके अनुसार जहां कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा है वहां की सड़क की चौड़ाई 40 फीट होनी चाहिए। कोचिंग सेंटर परिसर में दो पहिया और कार पार्किंग भी होनी चाहिए। छात्र-छात्राओं के अनुपात में अलग-अलग शौचालयों का होना आवश्यक है । अग्निशमन का निरापत्ति प्रमाण पत्र नगर परिषद अथवा नगर पालिका से ज़ारी होना चाहिए। जिस भवन में कोचिंग सेंटर चलाया जा रहा है वहां छात्रों के लिए कैटरिंग ,कॉउन्सलिंग कार्यालय ,स्टाफ रूम होना आवश्यक है। पूरे जिले में शायद ही किसी माफ़िया के कोचिंग सेंटर में अग्निशमन के लिए पुख़्ता व्यवस्था हो। दिल्ली में जब एक कोचिंग सेंटर में आग लगी तब ही पता चला कि ये माफ़िया किस तरह धन बल से अग्निशमन निरापत्ति प्रमाण पत्र हाँसिल कर लेते हैं। मैं दूर नहीं जाता देवली शहर की ही बात कर लेता हूँ। यहाँ शायद ही किसी कोचिंग सेंटर पर आग का हादसा होने पर बच निकलने के लिए माक़ूल रास्ते हों। स्ट्रेचर से पीड़ितों को नीचे लाने के रैंप हों। इन माफियाओं के लालच के कारण आख़िर हमारी पीढ़ियां कब तक फांसी के फंदों में झूलती रहेंगी। जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों को इस विषय पर कठोरता से संज्ञान लेने की आवश्यकता है।


कोचिंग सेंटर अधिनियम 2025 (राजस्थान कोचिंग सेन्टर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025) राजस्थान विधानसभा में पारित एक कानून है, जिसका उद्देश्य छात्रों की आत्महत्या रोकने, पारदर्शिता लाने और कोचिंग सेंटरों को विनियमित करना है; इसमें अनिवार्य पंजीकरण, शुल्क किस्त में लेने, तनाव प्रबंधन सत्र, मनोवैज्ञानिक परामर्श और 100 छात्रों की न्यूनतम संख्या जैसी शर्तें शामिल हैं, और नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान है।

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