देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। मंगलवार को टोक जिला मुख्यालय पर सुशासन सप्ताह के अन्तर्गत जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। पूर्व आई०ए०एस० शिवजी राम प्रतिहार इस बैठक में जिले का वरिष्ठ आई०ए०एस० (सेवानिवृत) अधिकारी होने के कारण मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। प्रतिहार ने बताया कि समय पर प्रातः 11 बजे बैठक में कलेक्ट्रेट कार्यालय में उपस्थित हुआ।
लेकिन दुःख की बात है कि जिला कलेक्टर स्वयं कार्यालय में उपस्थित होने के उपरान्त भी बैठक में उपस्थित नहीं हुई। अतिरिक्त जिला कलेक्टार टोंक भी बैठक में 20 मिनट बाद आये। यही नहीं जिला स्तरीय अधिकारी जो अत्यावश्क सेवाओं-बिजली, पानी, सडक आदि से जुड़े हुए है वह भी बैठक में उपस्थित नहीं हुए। राज्य सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की उपलब्धि एवं कियान्वयन एवं जनता की सहभागिता के लिए महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन राज्य सरकार के निर्देशानुसार किया गया था।
लेकिन इन बैठक में जिला कलेक्टर का मुख्यालय पर उपस्थित होने के उपरान्त भी भाग नहीं लेना ओर वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति इस बात को दर्शाती है कि सरकार की योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करवाने वाल वरिष्ठ अधिकारी कितने गंभीर है। यह शोचनीय विषय है। उल्लेखनीय है कि महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी का प्रचार प्रसार जनता के लिए करने के लिए प्रेस को जानकारी देना आवश्यक होता है, जो प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ है। लेकिन इस महत्त्वपूर्ण बैठक में प्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं था। जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि बैठक में प्रेस को आमंत्रित ही नहीं किया गया था। सुशासन के निम्नांकित सिद्धान्तों की पालना करने पर ही जनता को लाभ मिल सकता है -1. कानून व्यवस्था,2 जवाब देही,3. पारदर्शिता,जन भागिदारी,लाल फीताशाही में कमी लोक कल्याण कारी प्रशासन,त्वरित न्याय ।


