इंसानियत के नुमाइंदों ने बेबस अरमानों को दिया सहारा।

राख से फिर जी उठी उम्मीद : व्यापारियों ने बुजुर्ग की सूनी आँखों में लौटाई चमक

मानवता का उदाहरण….

जलकर खाक हुई दुकान को शहरवासियों ने मिलकर फिर से खड़ा किया…..

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। शहर में व्यापारियों ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने यह साबित कर दिया कि समाज का साथ हो तो कोई भी आपदा बड़ी नहीं होती। दरअसल 4 मार्च को धूलंडी की खुशियों के बीच बंगाली कॉलोनी के बुजुर्ग भरत सेन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। जब उनकी बरसों पुरानी हेयर कटिंग की दुकान आग की भेंट चढ़ गई। अपनी आजीविका को जलते देख बेबस बुजुर्ग की रुलाई ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर दिया था। इस दुख की घड़ी में युवक अंकित नाटाणी और व्यापारी मुरारी गर्ग ने जिम्मेदारी उठाई और व्यापारियों के सहयोग से ‘मदद के हाथ’ बढ़ाए। इस नेक मुहिम में पायल बाई किन्नर ने सबसे बड़ी राशि 11 हजार रुपए का योगदान दिया, जिसके बाद शहर के करीब 40 छोटे-बड़े व्यापारियों ने अपनी श्रद्धा अनुसार सहायता की। इसी तरह घीसालाल शर्मा ने 5 हजार का सहयोग दिया। वहीं राजेश नाटाणी, मोहन साहू, रितेश मंगल, डॉ. गुरमीत सेठी, धन्ना भगत गुरुद्वारा के बाबा शेर सिंह और सुंदर दास बिसनानी सहित कई लोगों के साझा प्रयास से 50 हजार 300 रुपए का फंड तैयार हुआ। इस राशि से न केवल भरत सेन के लिए एक नया और सुरक्षित केबिन तैयार किया गया, बल्कि उसमें कैंची, और कुर्सियों जैसे जरूरी सामान की व्यवस्था भी की गई। सोमवार को जब व्यापारियों ने मिलकर बुजुर्ग को उनकी नई दुकान की चाबियाँ सौंपी, तो उनकी आँखों में कृतज्ञता के आँसू और चेहरे पर फिर से वही पुरानी मुस्कान लौट आई। देवली के व्यापारियों के इस सामूहिक प्रयास ने यह संदेश दिया है कि एकजुटता से किसी का उजड़ा हुआ संसार फिर से बसाया जा सकता है।

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