सती चरित्र अटूट निष्ठा और अपमान के विरोध का प्रतीक:-कथावाचक अभिनव पाराशर।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। उपखंड के दूनी कस्बे के पास ही स्थित बहु विख्यात जन जन की आस्था के केंद्र काला नाडा बालाजी महाराज मंदिर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक पंडित अभिनव पाराशर ने कथा के तीसरे दिवस सती चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि सती,प्रजापति दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की पहली पत्नी थीं, जिन्होंने अपने पिता द्वारा शिव का अपमान किए जाने पर उनके यज्ञ में आत्मदाह कर लिया था। यह कथा प्रेम, अटूट निष्ठा और अपमान के विरोध का प्रतीक है। उनकी मृत्यु के बाद, वे पार्वती के रूप में जन्मीं और पुन: शिव की अर्धांगिनी बनीं, जिससे 51 शक्तिपीठ स्थापित हुए। साथ ही नरसिंह अवतार की भी कथा सुनाते हुए कहा कि नरसिंह अवतार भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों (दशावतार) में से चौथा अवतार है, जो वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अत्याचारी हिरण्यकश्यप के वध के लिए प्रकट हुए थे। इस अवतार में भगवान ने आधा मानव (शरीर) और आधा सिंह (मुख-पंजे) का रूप धारण किया था, ताकि हिरण्यकश्यप को मिले ब्रह्मा जी के वरदान की शर्तों को तोड़ा जा सके।

 

 

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