देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर देवली के अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 श्री श्री दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति जिस क्षेत्र में काम करे उसे उसमें तुरन्त ही सफलता प्राप्त हो। प्रत्येक व्यक्ति जिस काम को करता है, उसमें पूर्ण रूप से सफलता प्राप्ति का लक्ष्य उसके लिए प्रमुख होता है। सफलता के साथ असफलता भी जुड़ी हुई है। सफलता का लक्ष्य लेकर चलने वाले व्यक्ति भी अक्सर असफल हो जाते हैं।अपने आप में यह कोई अनहोनी नहीं है। इसलिए यदि सफलता के साथ-साथ कभी असफल भी होना पड़े तो धैर्य तथा हिम्मत नहीं खोनी चाहिए। अगर हिम्मत गंवा दी गई तो सफलता उससे बहुत दूर चली जायेगी। किसी भी काम की असफलता के पीछे अनेक कारण जिम्मेदार होते हैं।इन कारणों को खोज कर, उन पर गम्भीर चिन्तन मनन कर दूर करने का प्रयास करना चाहिये। पुनः प्रयास में व्यक्ति सफल होगा, यह निश्चित है।जो व्यक्ति असफलता के कारण तलाश करने के स्थान पर दोषारोपण दूसरों पर करते हैं, वे अक्सर सफलता का स्वाद चख नहीं पाते। एक बार असफल होने के बाद अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए फिर से जुट जाना चाहिए, पूरी हिम्मत के साथ। जिनके पास हिम्मत होती है, सफलता भी उसी को प्राप्त होती है। ठोकर खाकर गिर जाने के बाद तुरन्त उठकर खड़े होने की हिम्मत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कदम चूम लेती है खुद आके मंजिल, मुसाफिर अगर अपनी हिम्मत न हारे। स्वामी श्री विवेकानंद जी का यह अमर वाक्य हर व्यक्ति को याद रखना चाहिए-स्वामी जी कहा करते थे कि व्यक्ति को अपने लक्ष्य की तरफ तब तक प्रयत्न करना चाहिए, जब तक उसे अपने लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाये। महाराज श्री ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, ‘पुरुषोत्तम मास’ (जिसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है) हर लगभग तीन साल में एक बार आने वाला एक अतिरिक्त चंद्र मास है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह महीना भगवान विष्णु की कृपा पाने, भगवद् आराधना और दान-पुण्य के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।इस महीने में किए गए जप, तप, दान, और व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किया गया एक छोटा सा धार्मिक कार्य भी अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान, भागवत कथा श्रवण, और मंत्र जाप करने से साधक जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है।







