अस्पताल का भूत फिर निकला बोतल से,सड़कों पर उतरेंगे लोग फिर से।

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। राजकीय उप जिला अस्पताल के नए भवन के लिए प्रस्तावित स्थान को लेकर देवली में एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हाल ही में छह सदस्यीय समिति द्वारा नए स्थान के संबंध में रिपोर्ट दिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद शहरवासियों, व्यापारियों और विभिन्न संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। इसी मुद्दे पर रविवार को स्थानीय गुरुद्वारा परिसर में बैठक आयोजित हुई, जिसमें अस्पताल को शहर से दूर स्थानांतरित किए जाने का विरोध करते हुए इसे शहर के निकट ही बनाए जाने की मांग उठाई गई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उप जिला अस्पताल वर्षों से क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यदि नए भवन का निर्माण शहर से दूर किया जाता है तो मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। लिहाजा अस्पताल का नया भवन शहर के समीप ही बनाया जाना चाहिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि सोमवार सुबह 11 बजे धान मंडी सर्कल पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होंगे। यहां से जुलूस के रूप में मुख्य बाजार होते हुए उपखंड अधिकारी कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। विनोद धर्मानी ने बताया कि आंदोलन को लेकर व्यापारियों और आमजन से लगातार संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में जुलूस में शामिल होकर अस्पताल को शहर से बाहर नहीं ले जाने की मांग को मजबूती से उठाने की अपील की। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी जयपुर रोड स्थित म्हारो राजस्थान रिजॉर्ट मार्ग पर प्रस्तावित अस्पताल भवन का स्थानीय लोगों ने विरोध किया था। लोगों का कहना है कि यह स्थान शहर से काफी दूर होने के कारण आमजन के लिए असुविधाजनक रहेगा। विरोध के चलते निर्माण कार्य फिलहाल रुका हुआ है। पूर्व में बीबी जयपुर हाउस, पुरानी धान मंडी, डाक बंगला परिसर सहित अन्य संभावित स्थलों का भी निरीक्षण किया जा चुका है। अब छह सदस्यीय समिति की रिपोर्ट देने की बात सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। जिसे लोग सोमवार को विरोध करेंगे।

उक्त प्रकरण में सामाजिक कार्यकर्ता व युवा नेता मनोज शर्मा ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि
देवली का विकास या व्यक्तिगत राजनीति* – फैसला हमें करना है…..
आज देवली एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ लिया गया निर्णय आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा। अस्पताल केवल एक इमारत नहीं होता, बल्कि हजारों परिवारों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद होता है।
देवली को नए अस्पताल के निर्माण के लिए 35 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। यह देवली के लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। लेकिन इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि स्थान को लेकर बने गतिरोध के कारण एक बार इस परियोजना का टेंडर निरस्त (रद्द) हो चुका है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो कहीं ऐसा न हो कि यह बहुमूल्य परियोजना ही देवली के हाथ से निकल जाए और 35 करोड़ रुपये की यह सौगात किसी अन्य क्षेत्र को मिल जाए। तब सबसे बड़ा नुकसान देवली और देवलीवासियों का होगा। विशेषज्ञों द्वारा ऐसी जगह चिन्हित की गई है जहाँ आमजन आसानी से पहुँच सकें, एम्बुलेंस का आवागमन सुगम हो, भविष्य में अस्पताल का विस्तार भी संभव हो और साथ ही देवली शहर का विकास नई दिशा में आगे बढ़ सके। शहर की सीमा से लगे क्षेत्र में अस्पताल बनने से आने वाले वर्षों में आसपास का विकास होगा, नए व्यावसायिक अवसर बढ़ेंगे, आबादी का संतुलित विस्तार होगा और देवली की सीमाएँ भी स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ेंगी। इसके विपरीत, कुछ लोग इस 35 करोड़ रुपये की परियोजना को पुराने अस्पताल परिसर या किसी ऐसे स्थान पर ले जाने की बात कर रहे हैं, जहाँ भविष्य के विस्तार और शहर के विकास की संभावनाएँ सीमित हैं। सवाल यह नहीं है कि कौन-सी जमीन किसकी है। असली सवाल यह है कि क्या निर्णय देवली के भविष्य को देखकर लिया जाना चाहिए या फिर पुराने आग्रहों और व्यक्तिगत अहं को बनाए रखने के लिए?
यदि किसी स्थान का विरोध केवल इसलिए हो कि वह किसी ऐसे व्यक्ति की भूमि है जिसे कुछ लोग पसंद नहीं करते, तो यह विरोध किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि देवली के विकास का विरोध बन जाता है। विकास व्यक्ति देखकर नहीं होता, विकास दूरदृष्टि से होता है।
ज़रा सोचिए…
जब किसी मरीज की जान बचानी होगी, तब उसे इस बात से कोई मतलब नहीं होगा कि अस्पताल किसकी जमीन पर बना है। उसे केवल इतना चाहिए होगा कि अस्पताल समय पर पहुँचा जा सके, आधुनिक सुविधाओं से युक्त हो और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया गया हो।
आज आवश्यकता है कि देवली की जनता जागरूक बने। यह 35 करोड़ रुपये किसी व्यक्ति, किसी संस्था या किसी राजनीतिक दल के नहीं हैं। यह देवली की जनता का अधिकार है। यदि हम व्यक्तिगत मतभेदों और राजनीति के कारण इस अवसर को खो देंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी।
आज प्रश्न केवल अस्पताल का नहीं है, बल्कि देवली के भविष्य का है।
आइए, हम सब मिलकर ऐसी सोच का समर्थन करें जो देवली को आगे बढ़ाए, न कि ऐसी राजनीति का जो विकास के रास्ते में बाधा बने।
यदि आज हम चुप रहे, तो कल शायद पछताना पड़े कि 35 करोड़ रुपये की विकास परियोजना कुछ लोगों की जिद, अहंकार और खींचतान की भेंट चढ़ गई।

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