देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। श्री महावीर दिगंबर जैन धर्मशाला ट्रस्ट में विद्या बैरागी वर्धन वर्षा योग 26 के अंतर्गत मुनिश्री 108 वैराग्य सागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 सुप्रभ सागर जी महाराज के सानिध्य में 23वे तीर्थंकर भगवान पारसनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया सबसे पहले कार्यक्रम में भगवान का प्रथम अभिषेक एवं शांति धारा संजय कुमार अक्षत कुमार काला द्वारा कि इसके बाद भगवान के मोक्ष निर्माण पर 23 किलो का लाडू चढ़ाया गया जिसका पुण्यर्जन अनिल कुमार जी बाकलीवाल ने प्राप्त किया इसके अलावा और भी श्रद्धालुओं द्वारा मोक्ष निर्माण का लाडू चढ़ाया गया इस अवसर पर मुनिश्री 108 सुप्रभ सागर महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने सम्मेद शिखरजी (वर्तमान में झारखंड में स्थित) पर अपनी कठोर तपस्या पूरी की थी। भाद्रपद शुक्ल सप्तमी के दिन उन्होंने अपने सभी कर्मों का क्षय करके मोक्ष प्राप्त किया था। जैन दर्शन में मोक्ष को जीवन का अंतिम और सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है, जहां आत्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर अनंत सुख प्राप्त करती है। चूंकि भगवान पार्श्वनाथ ने इसी दिन निर्वाण प्राप्त किया था, इसलिए यह दिन भक्तों के लिए आत्म-कल्याण और आध्यात्मिक चेतना को जगाने का जरिया बनता है। देवली में भी सम्मेद शिखर की रचना की गई ओर इसकी प्रतिकृति के समक्ष उपस्थिति को हम सभी श्रद्धालु भी इसको सम्मेद शिखर का स्वर्ण भद्र कूट समझे। इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज के कई श्रद्धालु उपस्थित थे।






