घर परिवार में लडाई झगडे का मूल कारण आपसी सामञ्जस्य नहीं होना:-मुनि श्री।
देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। महावीर जिनालय में धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि सुप्रभसागर महाराज ने कहा कि भगवान के नाम उच्चारण करने से हमारी वाणी शुद्ध होती है और पापों की निर्जरा का कारण होता है।. मुनि श्री ने आगे कहा कि भगवान की पूजा संसार के दुःखों के नाश करने के लिए करते है और आत्म विशुद्धि की प्राप्ति के लिए करते है। भगवान जिनेन्द्र के अभिषेक के बाद जो गंधोदक होता है, वह मन को पवित्र करता है, पापों का नाश करने वाला है। गन्धोदक के द्वारा मैना सुन्दरी ने श्रीपाल आदि सात सौ कुष्ठ रोगियो का कुष्ठ दूर कर दिया था) गिद्ध जैसा मांसाहारी प्राणी भी गन्धोदक के द्वारा सुनहरी पंखों तथा रत्नमय चोंचवाला हो गया। हम भी यदि विनयपूर्वक गन्धोदक को धारण करे तो हमारे भी पाप नष्ट हो जाएगे। लोग सभा को सम्बोधित करते हुए मुनि वैराग्य सागर जी महाराज ने कहा आज घर परिवार में लडाई झगडे का मूल कारण आपसी सामञ्जस्य नहीं होना है। पढे लिखे हुए ही अधिक संबंध विच्छेद हो रहे है। पहले कम पढे-लिखे लोग थे, पर परिवार की, समाज की मर्यादा का ध्यान रखते थे। आज परिवार, समाज, और संबंधो की मर्यादा को तोड़कर गलत कदम उठाते हैं, वे अन्त में दुःख को पाते है।









