देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। शहर के गौरवपथ स्थित नगर पालिका के टीनशेड परिसर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ महोत्सव के दौरान महामंडलेश्वर दिव्य मुरारी बापू ने अपनी वाणी से श्रद्धालुओं को संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में भागवत महिमा का श्रवण करवाते हुए कहा कि मन को प्रेम से समझाकर प्रभु के मार्ग में लगाने और प्रभु स्मरण में लीन होकर खुली आँखों से ही प्रभु के दर्शन को ऊँची स्थिति पर पहुँचने की क्रिया चेतन समाधि कहलाती है। मन यदि प्रभु के मार्ग में जायेगा तो अपने आप सुधरेगा और सहज समाधि का अनुभव करेगा। ऐसे सत्पुरुषों का मन तो खुली आँखों के सामने सांसारिक दृश्य के होने पर भी पवित्र रहता है। इसका कारण यह है कि उनका मन प्रभु में संलग्न हो गया है। यही सच्ची समाधि है। ऐसी भक्ति दशा का अनुभव करते हुए श्री शुकदेवजी गंगा में स्नान करती हुई अनेक देवियों के पास से चले गये, पर उनका मन जरा सा भी विचलित नहीं हुआ, इसका कारण यह है कि उन्होंने अपने मन को भक्ति से प्रभु के मार्ग में लगा दिया था। जीवन में परिवर्तन लाने के लिए कथा सुनो। जीवन में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की वृद्धि और महान सदाचार के लिए कथा सुनो। श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा सुनाई गई वही कान्हा की जीवंत झांकी सजाकर जन्मोंत्सव मनाया गया। लाला के जन्म की सभी भक्तों ने एक दूसरे को बधाई दी। पूरा पांडाल श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। कथा के आयोजन से जुड़े महावीर प्रसाद शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि कथा के दौरान ब्राह्मण समाज द्वारा महाराज श्री का स्वागत अभिनंदन किया।





