देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। बड़ा दुख होता है कि जब इंसान का अंतिम सफर भी सुकून भरा ना हो सके। जिस्म से जान जुदा हो जाने पर आत्मा परमात्मा से मिल जाती है लेकिन पार्थिव शरीर की अंतिम क्रिया यानी अंतिम संस्कार इसी धरती पर होना होता है जब ये शरीर जो पंचतत्वों से बना है इसकी मोक्ष अथवा सदगति होती है ऐसा वेद पुराणों में लिखा हुआ है। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार अग्नि से मृत शरीर का खाक होना आवश्यक है। किंतु देवली के शमशान घाट में जाकर तो मुर्दे मरने के बाद भी दुखी है क्योंकि डेड बॉडी को जलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में लकड़ियां ही उपलब्ध नही है। ओर ये सिलसिला कई महीनों से निरंतर चला आ रहा है। पब्लिक की सुनने वाला कोई नही है। जिस कमेटी ने या सामाजिक संघटन ने इस कार्य की जिम्मेदारी ले रखी है वो आज की तारीख में लाचार व बेबस है। जबकि अन्य सामाजिक संघटोनो ने उक्त हालात को देखकर सहयोग करने की बात कही तो कथित मोक्षधाम कमेटी के सदस्यों को नागवार गुजरा। अब ऐसे में ऎसे मार्मिक मामले का हल निकालना आवश्यक हो गया है। क्योंकि मरण मौत का सिलसिला तो रुकने वाला नही है। आखिर कब तक इस संघटन के भरोसे इन अव्यवस्थाओं को ढोया जाएगा। व्यापार महासंघ के अध्यक्ष पंकज जैन ने बताया कि देवली शहर की महत्वपूर्ण धरोहर मोक्ष धाम जहां पर मृत्यु के उपरांत दाह संस्कार किया जाता है यहां की व्यवस्थाओं में बहुत कुछ कमी है जो सब लोगों को नजर आ रही है पिछले 10-20 सालों से शहर के गण मान्य व्यक्तियों के द्वारा एक शमशान कमेटी के नाम की संस्था चला कर इसकी देखरेख व लकड़ी की व्यवस्था की जाती है किंतु काफी दिनों से यहां पर व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल रही है आज के 15 दिन पूर्व में देवली के एक नागरिक चंद्रभान गोयल के द्वारा कहा गया कि लकड़ी मंगवा लो जो भी पैसा होगा उसकी व्यवस्था करके दे देंगे उस टाइम शमशान के गोदाम की हालत थी कि वहां पर एक लकड़ी का तिनका भी नजर नहीं आ रहा था और चारों गंदगी गंदगी फैल रही थी कुछ दिनों पश्चात 35 टन लकड़ी यहां पर मंगवाई गई जिसका भुगतान16000 किया गया 7000 चंद्रभान गोयल के द्वारा एवं 9000 जो देवली शमशान कमेटी द्वारा दिए गए हैं किंतु यह बात बहुत विचारणीय है जो देवली शमशान की कमेटी चला रहे हैं वहां पर लकड़ी की व्यवस्था है नहीं सफाई की व्यवस्था नही हो रही है और कुछ दिनों पश्चात देवली का एक संगठन भारत विकास परिषद जो इस मोक्ष धाम को गोद लेने की तैयार था लेकिन मोक्ष धाम कमेटी ने कुछ कारणों से मना कर दिया देवली में आज बहुत से संगठन चल रहे हैं जो कुछ सक्रिय कुछ निष्क्रिय है हो सकता है किसी भी संगठन में किसी व्यक्ति का विरोध हो सकता है लेकिन संगठन का विरोध नहीं होना चाहिए यह शमशान की भूमि है जिसको मोक्ष धाम के नाम से जाना जाता है यहां पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक नहीं होनी चाहिए चाहे वह कोई सा भी व्यक्ति हो आज यहां पर यह स्थिति उत्पन्न हो रही है की जिसके घर में मृत्यु होती है तो वह पहले लकड़ी की व्यवस्था करता है यह कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है अगर जो लोग देवली शमशान कमेटी चला रहे हैं अगर उनसे यह व्यवस्था नहीं देखी जा रही है तो वह एक आम मीटिंग की सूचना देकर या फिर नई संस्था बनाकर या फिर जो भी संगठन इसको लेना चाहे सार्वजनिक रूप से देना चाहिए और प्रतिवर्ष यहां से होने वाली आय ओर व्यय का विवरण पंपलेट के माध्यम से जनता के बीच रखा जाना चाहिए और जिसके भी परिवार में मृत्यु होती है दाह संस्कार के बाद उसके लकड़ी की रसीद भी काटी जाती है। किसी भी प्रकार से शमशान घाट कमेटी से कोई विरोध नहीं है लेकिन जो व्यवस्था चल रही है इसका पुरजोर विरोध होना चाइये। यहाँ लकड़ी का स्टॉक प्राप्त मात्रा में होना चाहिए,प्रतिदिन साफ सफाई होनी चाहिए,चौकीदार की ड्यूटी वही होनी चाहिए,पेड़ पौधों की कटाई और पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से होनी चाहिए साथ ही बैठने के लिए बरामदा निर्माण होना चाहिए।






