देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “म्यूल हंटर” के तहत टोंक पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने साइबर ठगी की अवैध धनराशि का संकलन और हस्तांतरण करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से मिले बैंक खातों में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों के अनुसार ₹6,42,740/- की साइबर ठगी की राशि प्राप्त होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में बनी विशेष टीम
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई टोंक पुलिस अधीक्षक (SP) रोशन मीणा के निर्देशानुसार एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (टोंक) रतनलाल भार्गव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मालपुरा) पुष्पेन्द्र सिंह तथा पुलिस उप अधीक्षक (देवली) हेमराज मुण्ड के कुशल सुपरविजन में अंजाम दी गई। देवली थानाधिकारी व पुलिस निरीक्षक दौलत राम गुर्जर के नेतृत्व में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए त्वरित विधिक कार्रवाई हेतु एक विशेष टीम का गठन किया गया था। मामले का संक्षिप्त विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि 31 मई 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में दो कारों में बैठे चार व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस टीम ने जब उनके कब्जे से मिले मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों और अन्य डिजिटल संसाधनों का तकनीकी परीक्षण किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच के दौरान एनसीआरपी पोर्टल पर सह-अभियुक्तों के बैंक खातों से संबंधित अलग-अलग राज्यों में कुल तीन शिकायतें दर्ज होना पाई गईं। पुलिस जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई कि मुख्य आरोपी इस पूरे नेटवर्क को चला रहा था। मुख्य आरोपी व अन्य सह-अभियुक्तों को उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक और क्यूआर/स्कैनर उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित (लालच देना) करता था। इन खातों (जिन्हें तकनीकी भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है) का उपयोग साइबर ठगों द्वारा आमजन से लूटी गई रकम को मंगाने के लिए किया जाता था। साइबर ठगी से अर्जित धनराशि इन खातों में प्राप्त होने के बाद, आरोपी नकदी निकासी या अन्य माध्यमों से राशि को मुख्य आरोपी तक पहुंचाते थे। इस काम के एवज में सह-अभियुक्तों को मोटा कमीशन दिया जाता था। प्रारंभिक अनुसंधान में यह भी उजागर हुआ है कि आरोपीगण साइबर ठगों द्वारा “शेयर मार्केट ट्रेडिंग” में अत्यधिक लाभ और त्वरित धनवृद्धि (जल्दी पैसा डबल करने) का प्रलोभन देकर आम जनता को ठगी का शिकार बनाते थे। इस प्रकार ठगी गई राशि के संग्रहण, हस्तांतरण और निकासी के लिए ही यह गिरोह संगठित रूप से ‘म्यूल बैंक खातों’ का संचालन कर रहा था। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े साइबर ठगों और बैंक खातों के बारे में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
पुलिस प्रशासन के अनुसार, इस पूरी सफल कार्रवाई और धरपकड़ के दौरान कांस्टेबल जीतराम, कांस्टेबल करतार, हुकमनाथ एवं महिला कांस्टेबल नीलम की बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका रही है।






