कभी विद्यालय में था एक पेड़ आज सैंकड़ों पेड़ पौधे तरुणराज ने शिक्षकों विद्यार्थियों व भामाशाह के साथ बदली विद्यालय की तस्वीर….
देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। आज के दिन विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2018 को नवाचारी शिक्षक तरुणराज सिंह राजावत खरेड़ा ने राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय सांवतगढ़ में अपना कार्य ग्रहण किया जब उन्होंने विद्यालय में कार्य ग्रहण किया तो उन्होंने देखा की भयंकर लू चल रही थी लू को रोकने के लिए एक पेड़ की छांव भी नहीं थी वह सोचने लगे कि यहां तो स्थिति रेगिस्तानी क्षेत्र से भी बदतर हो रही है तभी उन्होंने संकल्प लिया अपने साथी मुकेश प्रजापति के साथ की इस विद्यालय को हरा भरा करना है और वह निरंतर प्रयास करते रहे जब नया सत्र प्रारंभ हुआ तो विद्यालय के स्टाफ साथियों के सहयोग से पेड़ पौधे ले उनको लगाया उनके पानी की व्यवस्था की धीरे-धीरे संकल्प लिया एक जिसके तहत एक टाबर एक रूंख तथा आपनणों स्कूल आपको अभियान जिसके तहत हर शिक्षक वह हर विद्यार्थी को एक-एक पेड़ लगाने के साथ उसकी देखरेख की जिम्मेदारी दी गई जिसमें सभी बच्चों ने व स्टाप साथियों ने भी अपने कर्तव्य का पालन किया इसी बीच कोरोना महामारी ने विकराल रूप धारण कर लिया था शिक्षक तरुण राज सिंह राजावत खरेड़ा व साथी गंगा मिशन बैरवा ने कोरोना में अपना राष्ट्र धर्म निभाते बिमार लोगों की जानकारी उच्च अधिकारियों को देते व विद्यालय में रहकारी पेड़ पौधों की देखभाल करते दिन के अंदर वह जो कोरोना से ग्रसित रोगी थे उनकी देखभाल के लिए गांव में जाते और रात्रि के अंदर पेड़ पौधों को पानी पिलाते हैं धीरे-धीरे पेड़ पौधे बड़े-बड़े विशाल वृक्ष का रूप लेने लगे और वह संख्या बहुत हो गई है सैकड़ो में इसी बीच अब तरुणराज सिंह राजावत राष्ट्रीय कार्य जनगणना 2027 में लगे हुए हैं और वह जनगणना में अपना कर्तव्य निर्वाह करने के साथी जो बचा हुआ समय होता है वह पेड़ पौधों को पानी पिलाते हैं ताकि जो नौ तपा के अंदर पेड़ पौधों को नुकसान नहीं हो और इस भयंकर धूप के अंदर भी हो अपने पेड़ पौधों का अपने पुत्र के सम्मान उनकी रक्षा कर रहे हैं काबिले तारीफ है और पहले की तस्वीर और आज की जो तस्वीर लोग देखते हैं वह एकदम विश्वास नहीं करते हैं कि विद्यालय ऐसा भी था पहले वीरान विद्यालय अब पेड़ पौधे से हरित विद्यालय बन गया जिसमें अनेक जीव जंतु पक्षी अपना घर बनाए रखें और विद्यालय से 10 मीटर बाहर जाने पर तापमान और विद्यालय के अंदर आने पर लगभग 8 से 10 डिग्री तापमान में परिवर्तन पाया जाता है कि पेड़ पौधों के कारण विद्यालय हरा भरा है और प्रकाश की जो तीव्रता है वह काम है लोग कम चलती है इस कार्य में मुख्य रूप से संस्था प्रधान अशोक शर्मा, मुकेश प्रजापति, सुरेश कंवर, सुमन मीणा मानसिंह मीणा, गंगा बिशन बैरवा, हेमराज मीणा सहयोगी महत्वपूर्ण रहा है राजावत बताते हैं कि स्टाप व बच्चों के सहयोग के बिना यह कार्य पूरा नहीं होता साथ ही सभी ग्रामवासी भामाशाह उनका विशेष योगदान रहा है आज भी विद्यालय हरित विद्यालय के नाम से जाना जाता है।






