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मानसिक व भावनात्मक असंतुलन की शारीरिक व्याधियों का प्रमुख कारण हैः- दिव्य मुरारी बापू

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर देवली के अटल उद्यान स्थित टीनशैड प्लेटफार्म पर चल रही 15 दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ महामहोत्सव में कथा वाचन कर रहे महामंडलेश्वर 1008 श्री श्री दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि मानसिक व भावनात्मक असंतुलन ही शारीरिक व्याधियों का प्रमुख कारण है। जीवन में यदि समता है तो समझो आप शरीर से भी स्वस्थ हैं, मन से भी स्वस्थ हैं। जीवन में समता नहीं तो आप न शरीर से स्वस्थ होंगे और न ही मन से। समता का विकास इतना जरूरी है कि आने वाली प्रत्येक परिस्थिति को आप झेल सकें। आज वैज्ञानिकों ने अनुसंधान कर यह सिद्ध किया है कि हृदय रोग व कैंसर जैसे असाध्य रोगों से काफी जनता पीड़ित है, उसके विभिन्न कारणों में कुछ कारण है मानसिक व भावनात्मक असंतुलन। आज की पीढ़ी में क्रोध, प्रतिक्रिया, प्रतिस्पर्धा और असहिष्णुता का ऐसा दौर बढ़ रहा है कि वे छोटी-छोटी बातों की मन में गांठ बांध लेते हैं। ये गांठे ही आगे जाकर कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों की सर्जक है। इन असाध्य रोगों से मुक्त होने के लिये मन को सरल व‌ सहज बनाना होगा। क्षमा करना व क्षमा मान लेना सीखना होगा। छोटी-छोटी बातों की गांठे बांधनी छोड़नी होगी। श्री रामचरितमानस के प्रारम्भ में भगवती पार्वती ने भगवान शंकर से चौदह प्रश्न किये और इन्हीं चौदह प्रश्नों के उत्तर में भगवान शंकर ने भगवती पार्वती को माध्यम बनाकर सम्पूर्ण श्री राम कथा सुनाया था। जिसमें प्रथम प्रश्न निर्गुण निराकार परमात्मा का क्या स्वरूप है? इसी प्रकार अन्य प्रश्नों का भी उत्तर श्री राम कथा के द्वारा मिलता है। कथा के दौरान महिलाओं ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। कथा का समापन आरती व प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

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