मरीज बनी पानी की प्याऊ,कैसे बुझेगी सूखे कंठो की आग,ज्यादातर प्याऊ अतिक्रमण की जद में।

*राजकीय चिकित्सालय सहित शहर की मुख्य प्याऊ निष्क्रिय अवस्था व गंदगी की जद में……

* लापरवाही व सार संभाल के अभाव में खाक छानती प्याऊ…

* सामाजिक संगठनों से आमजन को उम्मीदें…..

* ज्यादातर प्याऊ अतिक्रमण की चपेट में…..

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। गर्मी का सीजन शुरू हो चुका है। पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता हर जीव के लिए मायने रखती है। बंद पड़े प्याऊ और सूखे कंठों की समस्या कुप्रबंधन या सामाजिक संघटनो की उदासीनता का संकेत है। इस आग को बुझाने के लिए सामुदायिक भागीदारी सहित सरकारी प्रयासों की भी आवश्यकता है। स्थानीय निवासियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और क्लबों को आगे आकर बंद पड़े प्याऊ की सफाई करवाने के साथ ही उनमें पीने के पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। जनता के बीच प्याऊ के महत्व को उजागर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं। यह एक मानवीय संकट है जिसे स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के सहयोग से दूर किया जा सकता है। आज की तारीख में देवली शहर में करीब डेढ़ दर्जन से अधिक प्याऊ सार संभाल के अभाव में निष्क्रिय हालात में पड़ी हुई है। अब विभिन्न सामाजिक संघटनो को इस ओर ध्यान आकर्षित करने की जरूरत है ताकि गर्मी के भीषण दौर में सूखे कंठो का सहारा बन सके। बस स्टैंड में मौजूद प्याऊ व शहर की कुछ अन्य प्याऊ पर बाहुबलियों ने अतिक्रमण भी कर रखा है जिनको प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण मुक्त करवाने की दरकार है।

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