देवली/टोंक:-(बृजेश भारद्वाज)। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत संस्था सिकोईडिकोन ने जिला प्रशासन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस प्रशासन एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के संयुक्त सहयोग से 6 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया। यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा जून माह को बाल श्रम के विरुद्ध ‘एक्शन मंथ’ के रूप में मनाने संबंधी जारी निर्देशों के तहत की गई। राज्य सरकार के निर्देशानुसार बाल मजदूरी की शिकायत वाले क्षेत्रों में जांच एवं संयुक्त अभियान चलाकर बच्चों को मुक्त कराने की कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में टोंक जिले में विभिन्न स्थानों पर संयुक्त निरीक्षण एवं बचाव अभियान संचालित किया गया, जिसके दौरान 6 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, टोंक के सचिव दिनेश कुमार जलथुरिया, बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक नवल खान, एएचटीयू प्रभारी देवेंद्र सिंह, कन्हैया एवं देविका सिकोईडिकोन से परियोजना समन्वयक देवेंद्र कुमार जांगिड़, विमल, किरण राजेंद्र, बुधराम उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बाल श्रम एवं बाल तस्करी के विरुद्ध जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रथ के माध्यम से जिले के विभिन्न ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बाल श्रम, बाल तस्करी, बाल विवाह तथा बच्चों के अधिकारों से संबंधित जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। सिकोईडिकोन द्वारा जिले में बाल श्रम एवं बाल तस्करी के विरुद्ध व्यापक जनजागरूकता अभियान भी संचालित किए गए, जिनमें विभिन्न सरकारी विभागों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सामुदायिक नेताओं एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। सिकोईडिकोन बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए कार्यरत देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है, जिसमें देशभर के 250 से अधिक नागरिक समाज संगठन जुड़े हुए हैं। मुक्त कराए गए बच्चों की आयु 12 से 17 वर्ष के बीच है। ये बच्चे विभिन्न वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में पिछले कई महीनों से कार्य कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चों से अत्यंत अमानवीय एवं शोषणकारी परिस्थितियों में कार्य कराया जा रहा था। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वातावरण में कम मजदूरी पर लंबे समय तक काम लेने के कारण उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। बच्चों को मुक्त कराने के बाद संबंधित नियोजकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है तथा बच्चों के पुनर्वास, मुआवजा, शिक्षा एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। जून माह को बाल श्रम के खिलाफ ‘एक्शन मंथ’ के रूप में मनाया जाता है। चूंकि बाल तस्करी बाल मजदूरी का एक प्रमुख कारण है, इसलिए इस दौरान नागरिक समाज संगठन, पुलिस एवं प्रशासन के साथ मिलकर तस्करों और उनके नेटवर्क की पहचान एवं निगरानी का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों एवं जिला प्रशासन को हरसंभव सहयोग का आश्वासन देते हुए सिकोईडिकोन के निदेशक श्री पी. एम. पाल ने कहा, “शोषण और मजदूरी से मुक्त कराए गए प्रत्येक बच्चे के शिक्षा, सुरक्षा और गरिमा के अधिकार की आज पुनः बहाली हुई है। बाल श्रम बच्चों को उनके बचपन और मूल अधिकारों से वंचित कर देता है, इसलिए इस समस्या से तत्काल और प्रभावी ढंग से निपटने की आवश्यकता है। बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं, बल्कि स्कूलों में है। चूंकि बाल तस्करी और बाल मजदूरी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए हम जिला प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर तस्करी की रोकथाम तथा बच्चों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।”जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत इसका साझा निगरानी तंत्र और आपसी सहयोग है। देशभर में फैले इसके सहयोगी संगठन एक-दूसरे की आंख और कान की तरह कार्य करते हैं तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से ट्रैफिकिंग के मामलों की निगरानी करते हैं। परिणामस्वरूप अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच देशभर में 1.45 लाख से अधिक बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया, जिनमें अधिकांश मामलों में बच्चों को बाल श्रम के लिए मजबूर किया गया था।








