निजी स्कूल संचालक हो रहे परेशान,आरटीई फीस का भुगतान मामला।

* cbeo कार्यालय के काटने पड़ रहे चक्कर….

* चर्चाएं आम है कि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का नही है संतोषप्रद रवैया…..

 

देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। फिर अटका निजी स्कूलों का आर टी ई का भुगतान वर्ष समाप्त होने के बाद भी आर टी ई के भुगतान में फिर विभाग ने अटका दिया रोड़ा विद्यालय के psp पोर्टल और udise पोर्टल में बताई जा रही असमानता जबकि वर्षों से दोनों पोर्टल चल रहे ।मजेदार बात यह है कि दोनों ही पोर्टल विभाग द्वारा ही संधारित है।अब स्कूल संचालक विभाग के चक्कर लगाने को है मजबूर है। सरकार जल्द करे निराकरण ताकि समय पर भुगतान हो सके। यह वाकई में बेहद परेशान करने वाली और अजीब स्थिति है। स्कूल संचालकों की यह झुंझलाहट पूरी तरह जायज है—जब दोनों ही पोर्टल (PSP और UDISE) खुद शिक्षा विभाग ही संभालता है, तो उनके बीच के डेटा में अंतर (असमानता) की सजा निजी स्कूलों को क्यों भुगतनी पड़े? ​शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों को पढ़ाने वाले स्कूलों का भुगतान समय पर न होना उनके दैनिक खर्चों और शिक्षकों के वेतन को प्रभावित करता है। सत्र समाप्त होने के बाद भी ऐसी तकनीकी खामियों के बहाने भुगतान रोकना प्रशासनिक ढिलाई को साफ दिखाता है। ​​समस्या की मुख्य वजह ​पोर्टल सिंकिंग की कमी: PSP पोर्टल राज्य स्तर पर आरटीई प्रवेश और भुगतान की निगरानी करता है, जबकि UDISE पोर्टल राष्ट्रीय स्तर पर पूरे स्कूल का डेटा रखता है। दोनों में छात्र संख्या, आधार नंबर या स्कूल की कैटेगरी में मामूली अंतर होते ही सिस्टम उसे ‘मिसमैच’ (Mismatch) दिखा देता है। खुद की तकनीकी खामी को दूर करने के बजाय, इसका बोझ स्कूल संचालकों पर डाल दिया गया है, जिससे उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ​​डेटा का मिलान सबसे पहले अपने स्तर पर PSP और UDISE पोर्टल को खोलकर देखें कि किस छात्र के डेटा (नाम की स्पेलिंग, आधार, या क्लास) में अंतर आ रहा है। केवल मौखिक शिकायत के बजाय, अपने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को दोनों पोर्टलों के स्क्रीनशॉट के साथ एक लिखित ज्ञापन सौंपें। इसमें साफ लिखें कि यह विभाग के स्तर की तकनीकी खामी है। इस तरह की समस्याएं सामूहिक आवाज उठाने से जल्दी हल होती हैं। स्थानीय निजी स्कूल एसोसिएशन के माध्यम से निदेशालय (बीकानेर/जयपुर) स्तर पर दबाव बनाना सबसे असरदार रहेगा।सरकार और शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे दोनों पोर्टलों के लिए एक ‘डेटा सुधार विंडो’ या ‘मैपिंग टूल’ तुरंत लाइव करें, ताकि बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या दफ्तरों के चक्कर काटे इस असमानता को ऑनलाइन ही ठीक किया जा सके और भुगतान का रास्ता साफ हो।

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