देवली:-(बृजेश भारद्वाज)। श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि श्री 108 वैराग्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर जी महाराज के सानिध्य में आष्टानिका महापर्व के 8वे दिन 1024 अर्घ समर्पित किये गए। मुनि श्री 108 वैराग्य सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि जब तीर्थंकर प्रभु को केवल ज्ञान होता है तब सौधर्म इन्द्र प्रभु की 1008 नामों से स्तुति करता है। तीर्थंकर प्रभु के 1008 लक्षण भी होते हैं उन्हीं 1008 गुणों को प्राप्त करने के लिए हम सबने अंतिम दिन सिद्ध भगवंतों की सहस्त्र नाम के साथ आराधना करते हुए 1024 विशेष अर्घ चढाए। अध्यक्ष संजय जैन एवं अंकित जैन डाबर ने बताया कि कल गुरुपूर्णिमा उत्सव मनाया जाएगा एवं दोपहर महाराज श्री द्वारा चातुर्मास कलश स्थापना भी होगी जिसमें देवली का सकल जैन समाज भाग लेगा। इस अवसर पर प्रथम अभिषेक ,शांति धारा, मुनि श्री के पाद प्रक्षालन ओर शास्त्र भेंट महावीर कुमार, मनीष कुमार बाकलीवाल ने प्राप्त किया। विधान के दौरान मंत्रोच्चार, भक्तिभाव एवं मंगल ध्वनियों से पूरा वातावरण धर्ममय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए सिद्ध परमेष्ठियों की आराधना कर विश्व शांति, राष्ट्र कल्याण एवं समस्त प्राणियों के मंगल की कामना की।







